UNSC: होर्मुज संकट पर भारत की दो टूक, ‘कमर्शियल जहाजों को भू-राजनीतिक तनाव का निशाना न बनाया जाए’

संयुक्त राष्ट्र, 19 सितंबर: भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता के सम्मान की मांग दोहराई है। भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश ने कहा कि कमर्शियल जहाजों को भू-राजनीतिक तनाव का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए और समुद्री मार्गों पर आवाजाही के अधिकारों को धमकी, जबरदस्ती या गैर-कानूनी प्रतिबंधों से प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।

बहरीन की ओर से आयोजित सुरक्षा परिषद की ‘आरिया-फॉर्मूला’ बैठक में बोलते हुए हरीश ने कहा कि भारत एक प्रमुख समुद्री राष्ट्र है और वह ऐसे समुद्री क्षेत्र का समर्थन करता है जो स्वतंत्र, खुला, सुरक्षित और नियम आधारित हो। उन्होंने कहा कि नेविगेशन और ओवरफ्लाइट के अधिकारों का अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS), के अनुरूप सम्मान किया जाना चाहिए।

  • होर्मुज में रुकावट से ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा पर असर

भारत ने कहा कि प्रमुख समुद्री मार्गों में रुकावट का असर केवल संबंधित क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। किसी एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर संकट बढ़ने से वैकल्पिक रास्तों पर दबाव, माल ढुलाई और बीमा लागत में बढ़ोतरी तथा ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति में व्यवधान हो सकता है। इसका असर विकासशील देशों पर भी पड़ सकता है।

भारत पहले भी होर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल शिपिंग और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जता चुका है। अप्रैल में भारत ने सुरक्षा परिषद में कहा था कि होर्मुज के जरिए वाणिज्यिक आवाजाही और नेविगेशन की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए।

  • भारतीय नौसेना के ऑपरेशन का किया जिक्र

पी. हरीश ने समुद्री सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना की ओर से किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। भारतीय मिशन के अनुसार, 14 सितंबर 2026 तक अदन की खाड़ी और लाल सागर में भारतीय समुद्री सुरक्षा अभियानों के तहत 449 से अधिक मर्चेंट जहाज सुरक्षित रूप से गुजर चुके थे। इन जहाजों में करीब 20.3 मिलियन मीट्रिक टन कार्गो और तेल था, जिसकी कीमत 8.4 अरब डॉलर से अधिक बताई गई है।

  • नाविकों की सुरक्षा को बताया प्राथमिकता

भारत ने संघर्ष प्रभावित समुद्री क्षेत्रों में फंसे नाविकों की सुरक्षा पर भी जोर दिया। हरीश ने कहा कि नाविकों को सामूहिक प्रयासों के केंद्र में रखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, सुरक्षित निकासी, चिकित्सा सहायता, क्रू बदलने और नाविकों की स्वदेश वापसी के लिए प्रभावी आकस्मिक योजनाओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत है।

अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने भी सितंबर में होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास कमर्शियल जहाजों पर हमलों को लेकर चिंता जताई थी। IMO के अनुसार, मौजूदा संघर्ष शुरू होने के बाद क्षेत्र में कमर्शियल जहाजों पर 80 हमले सत्यापित किए गए हैं, जिनमें कम से कम 22 नाविकों की मौत हुई है।

  • साइबर और ड्रोन जैसे नए खतरों पर भी चिंता

भारत ने समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में उभरते तकनीकी खतरों का भी मुद्दा उठाया। हरीश ने बिना चालक दल वाले सिस्टम से हमले, साइबर जोखिम और नेविगेशन तथा संचार में बाधा जैसे खतरों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, क्षमता निर्माण और तकनीक का जिम्मेदार इस्तेमाल जरूरी है।

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