अयोध्या : श्रीराम मंदिर के पुजारियों के लिए नई नियमावली लागू, तिलक व पंचकेशी अनिवार्य, मोबाइल पर भी प्रतिबंध

अयोध्या, 18 सितम्बर। अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में सेवा देने वाले अर्चकों के लिए नई नियमावली लागू कर दी गई है। रामलला समेत परिसर के अन्य मंदिरों में पुजारियों को अब धर्म समिति की ओर से निर्धारित पीत वस्त्र पहनने होंगे। सेवाकाल में तिलक लगाना और पंचकेशी का पालन भी अनिवार्य किया गया है। गर्भगृह में मोबाइल फोन, पर्स समेत किसी भी निजी या बाहरी वस्तु को ले जाने पर रोक लगा दी गई है। नई व्यवस्था सभी अर्चकों को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

सभी अर्चकों को तत्काल प्रभाव से नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश

धर्म समिति के सदस्य राजकुमार दास के अनुसार अर्चकों के लिए निर्धारित पीत वस्त्र पहनना अनिवार्य होगा। मौसम के अनुसार वस्त्रों में बदलाव किया जा सकेगा। सेवाकाल में तिलक लगाना जरूरी होगा और पंचकेशी परंपरा का पालन करना होगा। बाल, दाढ़ी, मूंछ और शिखा से जुड़े नियमों का भी पालन करना होगा।

गर्भगृह में निजी सामान पर रोक

अर्चक गर्भगृह में मोबाइल फोन, पर्स अथवा अन्य निजी सामान नहीं ले जा सकेंगे। मंदिर व्यवस्था की ओर से उपलब्ध कराए गए भोग-प्रसाद के अलावा बाहर की कोई सामग्री भी गर्भगृह में ले जाने की अनुमति नहीं होगी। निजी सामान रखने के लिए लॉकर की व्यवस्था की गई है।

शौच के बाद बिना स्नान किए मंदिर में प्रवेश नहीं

नई नियमावली में शुचिता को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। शौच के बाद बिना स्नान किए अर्चक मंदिर या कोठार में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। सेवाकाल के दौरान निर्धारित सेवा स्थल पर रहना होगा। किसी जरूरी काम से स्थान छोड़ने पर पाली प्रमुख को लिखित सूचना देनी होगी।

ड्यूटी में बातचीत और हास-परिहास से दूरी

अर्चकों को सेवाकाल में अनावश्यक बातचीत, समूह में चर्चा और हास-परिहास से दूर रहने को कहा गया है। मंदिर व्यवस्था, धर्मगुरु और आचार्यों के अलावा ट्रस्ट के कार्यकर्ताओं या सुरक्षाकर्मियों से अनावश्यक संपर्क और बातचीत से भी बचने के निर्देश हैं। किसी असंतोष या असहयोग की स्थिति में आचार्य से मार्गदर्शन लेने को कहा गया है। सेवाकाल समाप्त होने पर पाली की लिखित समीक्षा देने का भी प्रावधान है।

नियम टूटने पर शुद्धिकरण की व्यवस्था

मंदिर की निर्धारित मर्यादा का उल्लंघन होने पर शुद्धिकरण की प्रक्रिया अपनाने का प्रावधान रखा गया है। नियमों के बार-बार उल्लंघन की स्थिति में काररवाई की जा सकती है। नई नियमावली का उद्देश्य पूजा-पद्धति, शुचिता और मंदिर की आंतरिक व्यवस्था में अनुशासन बनाए रखना है।

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