लखनऊ, 21 अगस्त। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अनियमित खान-पान, लंबे समय तक बैठे रहना और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण कई तरह की परेशानियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में नियमित योग और संतुलित आहार को दिनचर्या का हिस्सा बनाना शरीर और मन दोनों के लिए फायदेमंद हो सकता है। योग के कई आसनों में कूर्मासन को भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
कूर्मासन संस्कृत के ‘कूर्म’ शब्द से बना है, जिसका अर्थ कछुआ होता है। इस आसन में शरीर की मुद्रा कछुए जैसी दिखाई देती है, इसलिए इसे कछुआ आसन भी कहा जाता है। योग परंपरा में माना जाता है कि कछुए की तरह शरीर को भीतर की ओर समेटने वाली यह मुद्रा व्यक्ति को मानसिक रूप से शांत और अंतर्मुखी होने में मदद कर सकती है।
रीढ़ की हड्डी के लिए उपयोगी
कूर्मासन एक उन्नत स्तर का योगासन है, जिसमें शरीर को आगे की ओर झुकाकर हाथों और पैरों को एक विशेष स्थिति में रखा जाता है। नियमित और सही तरीके से इसका अभ्यास करने से शरीर के लचीलेपन पर काम किया जा सकता है। खासतौर पर पीठ और रीढ़ के आसपास के हिस्से में खिंचाव महसूस होता है। हालांकि, किसी भी योगासन को बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। अगर पहले से पीठ या रीढ़ की समस्या है तो अभ्यास शुरू करने से पहले योग विशेषज्ञ या चिकित्सक की सलाह लेना बेहतर है।
पाचन के लिए भी फायदेमंद
कूर्मासन के दौरान पेट और शरीर के निचले हिस्से पर हल्का दबाव पड़ता है। योग परंपरा में इसे पाचन तंत्र के लिए उपयोगी माना जाता है। नियमित योग अभ्यास, संतुलित खान-पान और पर्याप्त शारीरिक गतिविधि पाचन स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद कर सकते हैं।
तनाव और मानसिक शांति में मदद
कूर्मासन का अभ्यास शरीर के साथ-साथ मन को शांत करने में भी मदद कर सकता है। योग और नियंत्रित श्वास का अभ्यास तनाव कम करने और मानसिक एकाग्रता बढ़ाने में सहायक हो सकता है। लगातार तनाव या मानसिक दबाव महसूस करने वाले लोगों के लिए नियमित योग अभ्यास एक उपयोगी जीवनशैली गतिविधि हो सकता है।
कूर्मासन करते समय रखें सावधानी
कूर्मासन एक अपेक्षाकृत कठिन योगासन है, इसलिए इसे बिना सही तकनीक जाने करने से चोट लगने का खतरा हो सकता है। जिन लोगों को घुटने, कमर, कंधे या रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्या है, उन्हें विशेषज्ञ की देखरेख में ही इसका अभ्यास करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को भी इस तरह के कठिन योगासन का अभ्यास करने से पहले डॉक्टर या प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। गंभीर गठिया या सायटिका जैसी समस्या होने पर भी स्वयं से कूर्मासन करने से बचना उचित है।
नोट: योग को स्वास्थ्य और फिटनेस के लिए अपनाया जा सकता है, लेकिन किसी बीमारी के इलाज के लिए इसे डॉक्टर की सलाह या निर्धारित उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।


