हल्द्वानी में शुद्धिकरण हवन पर भड़के खड़गे, बोले- रामलीला मैदान में हवन की जरूरत क्या थी?

नई दिल्ली, 13 अगस्त। उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस की ‘विजय शंखनाद’ रैली के बाद रामलीला मैदान में हुए ‘शुद्धिकरण हवन’ को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भाजपा और हिंदू संगठनों पर निशाना साधा है। खड़गे ने इस आयोजन पर सवाल उठाते हुए कहा कि रामलीला मैदान सभी राजनीतिक दलों की जनसभाओं के लिए इस्तेमाल होता है, ऐसे में कांग्रेस की रैली के बाद वहां ‘शुद्धिकरण’ के नाम पर हवन करने की जरूरत क्या थी।

दरअसल, 8 अगस्त को हल्द्वानी में कांग्रेस की ‘विजय शंखनाद’ रैली आयोजित की गई थी, जिसे कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने संबोधित किया था। रैली के बाद श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास की ओर से रामलीला मैदान में शुद्धिकरण हवन का आयोजन किया गया।

  • ‘ऐसे कदम हिंदू धर्म के खिलाफ’

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए खड़गे ने कहा कि कांग्रेस शुरू से कहती रही है कि देश में दलितों के लिए जगह नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्म के नाम पर लोगों को बांटने की कोशिश की जा रही है।

खड़गे ने कहा कि रामलीला मैदान में सभी राजनीतिक दलों की सभाएं होती हैं। ऐसे में किसी एक राजनीतिक दल की सभा के बाद वहां शुद्धिकरण हवन करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन समाज को बांटने और जातियों के बीच विवाद पैदा करने का काम करते हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि इस तरह के कदम सबसे पहले हिंदू धर्म के ही खिलाफ हैं। उनके मुताबिक धर्म के नाम पर इस तरह की राजनीति देश के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाती है।

  • अमित शाह के बयान पर भी साधा निशाना

खड़गे ने गृह मंत्री अमित शाह के एक बयान को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने एजेंडे को पूरा करने के बाद अब विपक्ष और अन्य दलों से समय मांगने की बात कर रही है।

खड़गे ने कहा, “19 दिन संसद चला और कम से कम 25-26 दिन आपके पास थे, तो उस समय आपको ये याद नहीं आया। जब आपका एजेंडा पूरा हो गया, तब आप तैयार होते हैं। सबके 19 दिन बर्बाद करने के बाद अब समय मांगते हैं। ये शर्म की बात है।”

उन्होंने कहा कि संसद का समय बेहद महत्वपूर्ण है और सरकार को सभी दलों को साथ लेकर काम करना चाहिए। खड़गे के इन बयानों के बाद हल्द्वानी के ‘शुद्धिकरण हवन’ और संसद में सरकार के रवैये को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।

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