अमरावती में केंद्रीय सरकारी कार्यालय परिसर को CCEA की मंजूरी, परियोजना पर खर्च होंगे 1299 करोड़ रुपये

नई दिल्ली, 10 जून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने आंध्र प्रदेश की नई राजधानी अमरावती में सेंट्रल गवर्नमेंट जनरल पूल ऑफिस एकॉमोडेशन (CGGPOA) के निर्माण को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना विभिन्न केंद्रीय सरकारी कार्यालयों को एक ही परिसर में स्थापित करने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है, जिससे विभागों के बीच बेहतर समन्वय और प्रशासनिक कार्यों में दक्षता बढ़ाई जा सके।

इस परियोजना की अनुमानित लागत 1,299.08 करोड़ रुपये है, जिसका वित्तपोषण केंद्र सरकार द्वारा बजटीय सहायता से किया जाएगा। परियोजना का क्रियान्वयन आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के तहत केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) द्वारा किया जाएगा। सरकार ने बताया कि निविदा प्रक्रिया की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और टेंडर दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं।

5.53 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा कार्यालय परिसर

यह कार्यालय परिसर 5.53 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा और इसमें दो प्रमुख ब्लॉक बनाए जाएंगे। एक ब्लॉक प्लॉट C-9 पर ग्राउंड प्लस 13 मंजिलों का होगा, जबकि दूसरा ब्लॉक प्लॉट C-8 पर ग्राउंड प्लस 10 मंजिलों का बनाया जाएगा। परियोजना का कुल निर्मित क्षेत्रफल लगभग 23.25 लाख वर्ग फुट (2,16,032 वर्ग मीटर) होगा।

लगभग 8000 अधिकारियों और कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था

सरकार के अनुसार, इस परिसर में करीब 8,000 अधिकारियों और कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था होगी। इसके अलावा लगभग 1,800 कारों के लिए पार्किंग सुविधा भी विकसित की जाएगी। परियोजना को पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा दक्ष बनाने के लिए इसे भारत के उच्चतम ग्रीन बिल्डिंग मानकों के अनुरूप डिजाइन किया जाएगा। परिसर को कम से कम GRIHA 4-स्टार रेटिंग प्राप्त करने के लक्ष्य के साथ विकसित किया जाएगा और यह एनर्जी कंजर्वेशन एंड सस्टेनेबल बिल्डिंग कोड (ECSBC) 2024 का पालन करेगा।

500 सीटों वाला बहुउद्देश्यीय हॉल और 4 कैंटीन जैसी सुविधाएं भी

कार्यालय परिसर में कर्मचारियों और आगंतुकों के लिए बैंक, एटीएम, डाकघर, क्रेच, मनोरंजन कक्ष, महिला विश्राम कक्ष, 100 सीटों वाला कॉन्फ्रेंस हॉल, 500 सीटों वाला बहुउद्देश्यीय हॉल और चार कैंटीन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। साथ ही, दिव्यांगजनों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परिसर को पूरी तरह बैरियर-फ्री बनाया जाएगा।

सरकार का कहना है कि इस परियोजना से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। निर्माण चरण के दौरान प्रतिवर्ष लगभग सात लाख मानव-दिवस रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है जबकि संचालन चरण में करीब 50 हजार मानव-दिवस रोजगार सृजित होंगे।

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