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CBSE ने OSM सिस्टम का किया बचाव, कहा- 12वीं कक्षा के मूल्यांकन में नहीं हुआ AI का इस्तेमाल

CBSE ने OSM सिस्टम का किया बचाव, कहा- 12वीं कक्षा के मूल्यांकन में नहीं हुआ AI का इस्तेमाल

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नई दिल्ली, 17 मई। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने  12वीं कक्षा की मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर चिंताओं के बीच ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम का बचाव करते हुए कहा है कि इसे पारदर्शिता व मानकीकरण को बेहतर बनाने के लिए शुरू किया गया था। बोर्ड ने साथ ही मूल्यांकन प्रक्रिया में AI के इस्तेमाल की बात भी खारिज की है।

CBSE 12वीं कक्षा की मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर स्कूल शिक्षा सचिव संजय कुमार ने कहा, ‘छात्रों की चिंताएं ही हमारा मुख्य फोकस हैं। 2014 में यह टेक्नोलॉजी तैयार नहीं थी, लेकिन अब इसे फिर से शुरू किया गया है। आईसीएआई, आईबी और कैम्ब्रिज भी इसी तरह के सिस्टम अपनाते हैं।’

बोर्ड की तरफ से यह स्पष्टीकरण तब आया, जब कई छात्रों ने 2026 के बोर्ड नतीजों में कम नंबर, बिना जांची गई उत्तर-पुस्तिकाएं और विसंगतियों का आरोप लगाया, जिससे डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया की आलोचना शुरू हो गई।

आंसर शीट में सुधार के लिए मल्टी-स्टेज रिव्यू सिस्टम की घोषणा

इसी क्रम में सीबीएसई ने उन छात्रों के लिए एक मल्टी-स्टेज रिव्यू सिस्टम की घोषणा की है, जो अपनी आंसर शीट में सुधार करवाना चाहते हैं। 19 मई से 22 मई तक, छात्र वैरिफिकेशन या री-इवैल्यूएशन का अनुरोध करने से पहले, अपनी जांची गई आंसर शीट की स्कैन की हुई कॉपी के लिए अप्लाई कर सकते हैं।

फीस घटाकर 100 रुपये प्रति कॉपी और 25 रुपये प्रति प्रश्न की गई

मल्टी-स्टेज रिव्यू सिस्टम के तहत फीस घटाकर 100 रुपये प्रति कॉपी और 25 रुपये प्रति प्रश्न कर दी गई है। बोर्ड ने कहा कि अगर रिव्यू के बाद नंबर बढ़ते हैं तो फीस वापस कर दी जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष लगभग 98.6 लाख आंसर शीट जांची गईं, जिनमें से लगभग 13,000 में गलतियां पाई गईं और बाद में उन्हें मैन्युअली दोबारा जांचा गया।

OSM की ट्रेनिंग के बाद 77,000 शिक्षकों ने जांच के काम में हिस्सा लिया

सीबीएसई ने कहा कि OSM के तहत हर जवाब को अलग-अलग जांचा जाता है, और जांच करने वालों को पिछले वर्षों के पेपर और मार्किंग स्कीम का इस्तेमाल करके ट्रेनिंग दी जाती है। ट्रेनिंग के बाद लगभग 77,000 शिक्षकों ने जांच के काम में हिस्सा लिया। बोर्ड ने यह भी माना कि सिस्टम शुरू करते समय कुछ शुरुआती दिक्कतें आईं थीं, लेकिन बाद में सिस्टम ठीक हो गया।

अधिकारियों ने यह भी बताया कि जांच की प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल नहीं किया गया था। उन्होंने कहा, ‘मूल्यांकन में कोई बदलाव नहीं हुआ है, केवल मानकीकरण (standardisation) लागू किया गया है।’ साथ ही यह भी बताया कि भविष्य की परीक्षाओं में ओएसएम जारी रहेगा। इसी क्रम में कॉलेज में दाखिले के लिए लाखों छात्रों के 12वीं कक्षा के अंकों पर निर्भर होने के कारण, सीबीएसई द्वारा मूल्यांकन संबंधी चिंताओं को जिस तरह से संभाला जा रहा है, उस पर आगे भी बारीकी से नजर रखे जाने की उम्मीद है।

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