नेसेट में पीएम मोदी के संबोधन पर कांग्रेस ने साधा निशाना- ‘भारत की नैतिक प्रतिष्ठा गिरा दी’

नई दिल्ली, 26 फरवरी। कांग्रेस ने इजराइली संसद नेसेट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन को लेकर उनपर निशाना साधा है। पार्टी का कहना है कि पीएम मोदी का भाषण उनके मेजबान इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू का ‘खुला बचाव’ था। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री की आलोचना करते हुए यहां तक कह दिया कि उन्होंने भारत की नैतिक प्रतिष्ठा घटा दी है।

‘संबोधन में इजराइली पीएम का खुला बचाव’

कांग्रेस सांसद और पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने इजराइल की स्थापना के मसले पर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और अलबर्ट आइंस्टीन की चिट्ठियों को साझा करते हुए एक्स पर लिखा है, ‘कल नेसेट में अपने संबोधन के दौरान उनके मेजबान (बेंजामिन नेतन्याहू) का खुला बचाव था। प्रधानमंत्री मोदी ने इस तथ्य की ओर ध्यान दिलाया कि जिस दिन उनका जन्म हुआ, उसी दिन भारत ने इजराइल को नए राष्ट्र के रूप में मान्यता दी।’

नेहरू और अलबर्ट आइंस्टीन की चिट्ठी शेयर की

जयराम रमेश ने आगे बताया कि ‘असल में 13 जून, 1947 को अल्बर्ट आइंस्टीन ने इजराइल की स्थापना को लेकर जवाहरलाल नेहरू को चिट्ठी लिखी थी। नेहरू ने एक माह बाद आइंस्टीन को उत्तर दिया। 5 नवम्बर, 1949 को दोनों की मुलाकात प्रिंसटन स्थित आइंस्टीन के घर पर हुई। नवम्बर 1952 में आइंस्टीन को इजराइल के राष्ट्रपति पद का प्रस्ताव दिया गया, लेकिन उन्होंने अस्वीकार कर दिया।’

भारत की नैतिक प्रतिष्ठा गिराने का लगाया आरोप

जयराम रमेश ने बाद में एक और ट्वीट को रिट्वीट कर पीएम मोदी पर जोरदार हमला किया। दरअसल, एक ट्विटर हैंडल से इजराइली एक्टिविस्ट के एक आर्टिकल पर टिप्पणी की गई थी, जिसमें पीएम मोदी के संबोधन की आलोचना की गई थी। इसपर जयराम रमेश ने अपनी प्रतिक्रिया में लिखा ‘ईटे मैक एक जाने-माने इजराइली वकील और हिम्मत वाले मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। उन्होंने नेसेट में कल के प्रधानमंत्री के बहुत ज्यादा प्रशंसित (गोदी मीडिया में) भाषण के दिखावे का खुलासा कर दिया है, जिसने भारत की नैतिक प्रतिष्ठा गिरा दी है।’

17 सितम्बर, 1950 को दी इजराइल को मान्यता

भारत और इजराइल आज एक मजबूत रणनीतिक साझेदार हैं। 17 सितम्बर, 1950 को ही भारत ने इजराइल को आधिकारिक मान्यता दी थी। लेकिन, दोनों देशों के बीच पूर्ण कूटनीतिक संबंध 1992 में स्थापित हुए, जिसके बाद इमिग्रेशन ऑफिस, ट्रेड ऑफिस और कॉन्सुलेट की जगह रेगुलर एंबेसी खोली गई।

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