जम्मू-कश्मीर ने रचा इतिहास, पहली बार रणजी ट्रॉफी के फाइनल में, कर्नाटक से खिताबी टक्कर संभव

कल्याणी, 18 फरवरी। जम्मू-कश्मीर ने भारतीय क्रिकेट इतिहास में बुधवार को नए अध्याय का सृजन किया, जब उसने राष्ट्रीय क्रिकेट की श्रेष्ठता की प्रतीक रणजी ट्रॉफी प्रतियोगिता में पहली बर फाइनल में जगह बना ली। पारस डोगरा की अगुआई वाली टीम ने यहां बंगाल क्रिकेट अकादमी ग्राउंड पर दूसरे सेमीफाइनल के चौथे दिन मेजबान पश्चिम बंगाल को छह विकेट से हराकर यह उपलब्धि अर्जित की।

वंशज व समद ने जम्मू-कश्मीर को दिलाई मंजिल

जम्मू-कश्मीर ने दूसरी पारी में 126 रनों के मामूली लक्ष्य का पीछा करते हुए 34.4 ओवरों में चार विकेट खोकर जीत हासिल की। पिछली शाम के स्कोर 2-43 से मेहमानों ने पारी आगे बढ़ाई। 28वें ओवर तक 71 के स्कोर पर चार बल्लेबाज लौट गए, जिनमें शुभम पुंडीर (27 रन, पांच चौके) भी शामिल थे। लेकिन वंशज शर्मा (नाबाद 43 रन, एक छक्का, चार चौके) व अब्दुल समद (नाबाद 30 रन, तीन छक्के, एक चौका) ने अटूट 55 रनों की साझेदारी से जम्मू-कश्मीर खेमे की बांछें खिला दीं।

उत्तराखंड के खिलाफ कर्नाटक को 802 रनों की दुर्जेय बढ़त

जम्मू-कश्मीर की अब फाइनल में आठ बार के विजेता कर्नाटक से मुकाबले के पूरे आसार हैं, जिसने लखनऊ में खेले जा रहे पहले सेमीफाइनल में उत्तराखंड के खिलाफ पहली पारी के आधार पर 503 रनों की भारी भरकम लीड लेने के बावजूद चौथे दिन दूसरी पारी में बल्लेबाजी का फैसला किया। दिन का खेल खत्म हुआ तो कर्नाटक ने छह विकेट पर 299 बनाए थे। इस प्रकार उसकी कुल बढ़त 802 रनों की हो चुकी है। देखा जाए तो उत्तराखंड पांचवें व अंतिम दिन असंभव लक्ष्य का पीछा करने उतरेगा। यानी कर्नाटक का 15वीं बार फाइनल में प्रवेश तय है।

मो. शमी के करिअर बेस्ट प्रदर्शन (8-90) के बावजूद बंगाल मायूस

जहां तक बंगाल की बात है तो वह भारत के अनुभवी पेसर मोहम्मद शमी के करिअर बेस्ट गेंदबाजी प्रदर्शन (8-90) के बावजूद अनुशासित जम्मू-कश्मीर के तेज आक्रमण और लचीले मध्य क्रम के सामने हार गई।

पेसरद्वय ऑकिब व सुनील ने रखी जम्मू-कश्मीर की जीत की नींव

दरअसल, जम्मू-कश्मीर की ऐतिहासिक जीत की नींव उनके तेज गेंदबाजों की जोड़ी – ऑकिब नबी (4-36) और सुनील कुमार (4-27) ने रखी। बंगाल ने पहली पारी में 26 रन की मामूली बढ़त बना ली थी, लेकिन तीसरे दिन उसकी दूसरी पारा बुरी तरह ढह गई। जम्मू-कश्मीर के गेंदबाजों ने सुबह के हालात का फायदा उठाकर मेजबानों को 25.1 ओवरों में सिर्फ 99 रनों पर समेट दिया।

पदार्पण के 67 वर्षों बाद जम्मू-कश्मीर पहली बार खिताबी देहरी पर

मुकाबले के चौथे व अंतिम दिन खेल शुरू हुआ तो जम्मू-कश्मीर को जीत के लिए 83 रन चाहिए थे। मेहमान बल्लेबाजों ने शमी एंड कम्पनी के सामने तनिक भी घबराहट नहीं दिखाई और शुभम के बाद वंशज व समद ने जम्मू-कश्मीर का 67 वर्षों का इंतजार खत्म कर दिया, जिसने 1959 में इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में पदार्पण किया था। दिलचस्प तथ्य यह है कि जम्मू-कश्मीर ने मध्य प्रदेश को हराकर पहली बार सेमीफाइनल में भी जगह बनाई थी और अब फाइनल में कदम रख लिया।

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