केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का फैसला : अब संस्कृत के छात्र भी बनेंगे डॉक्टर, 12वीं कक्षा के बाद ले सकेंगे प्रवेश
लखनऊ, 16 जनवरी। संस्कृत पढ़ने वाले छात्र भी अब डॉक्टर बन सकेंगे। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने अथर्ववेद के उपवेद आयुर्वेद की वैश्विक स्तर पर बढ़ती स्वीकार्यता और भारतीय आयुर्वेदिक उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए यह अहम फैसला लिया है। इसके तहत संस्कृत पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों के लिए 12वीं कक्षा के बाद साढ़े सात वर्ष का विशेष पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है, जिससे वे विधिवत आयुर्वेद डॉक्टर बन सकेंगे।
आयुर्वेद गुरुकुलम् से जुड़ने के लिए ऑनलाइन आवेदन
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी और राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (एनसीआईएसएम) की अध्यक्ष डॉ. मनीषा यू. कोठेकर ने आयुर्वेद गुरुकुल संबद्धता पोर्टल का शुभारंभ किया। देशभर की वे संस्कृत संस्थाएं, जो निर्धारित पात्रता रखती हैं, आयुर्वेद गुरुकुलम् से जुड़ने के लिए पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगी। पंजीकरण, निरीक्षण और संबद्धता की प्रक्रिया को पारदर्शी, सुव्यवस्थित और पूर्णत डिजिटल बनाया गया है, जिससे गुरुकुल आधारित आयुर्वेद शिक्षा को सशक्त राष्ट्रीय नियामक ढांचा प्राप्त होगा।
उल्लेखनीय है कि नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप यह पहल परंपरा और नवाचार के संतुलन का उदाहरण माना जा रहा है। आयुर्वेद, संस्कृत, दर्शन, योग और संहिता एक-दूसरे के पूरक हैं और गुरुकुल प्रणाली के माध्यम से इनका समन्वित अध्ययन संभव हो सकेगा। यह कार्यक्रम भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक और कौशल विकास से जोड़ते हुए विद्यार्थियों को समग्र शिक्षा प्रदान करेगा।
क्या है आयुर्वेद व संस्कृत का संबंध
कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने बताया कि आयुर्वेद का संस्कृत से अविभाज्य संबंध है। संस्कृत के बिना आयुर्वेद दर्शन, शरीर-विज्ञान और चिकित्सा सिद्धांतों को गहराई से समझना संभव नहीं है। यह पाठ्यक्रम तत्त्वज्ञान, चिकित्सा विज्ञान और भारतीयता के समन्वय के माध्यम से विद्यार्थियों को व्यावहारिक और सैद्धांतिक दोनों स्तरों पर सक्षम बनाएगा।
आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति नहीं बल्कि जीवनशैली है
प्रो. वरखेड़ी ने कहा कि आयुर्वेद के प्रति वैश्विक रुचि लगातार बढ़ रही है। गुरुकुल आधारित यह मॉडल भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करेगा। आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि जीवनशैली है, जिसकी जड़ें संस्कृत शास्त्रों में निहित हैं।
7.5 वर्ष का विशेष पाठ्यक्रम निर्धारित
उन्होंने बताया कि प्री-आयुर्वेद प्रोग्राम के तहत सात वर्ष छह माह की समेकित अवधि का पाठ्यक्रम निर्धारित किया गया है। इसमें दो वर्ष का प्री-आयुर्वेद कार्यक्रम, चार वर्ष छह माह का बीएएमएस पाठ्यक्रम और एक वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप सम्मिलित होगी।
