22 अगस्त 2026 पंचांग: दशमी तिथि के बाद लगेगी एकादशी, जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और दिशाशूल

नई दिल्ली, 22 अगस्त। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है। शुभ कार्य, यात्रा, निवेश और पूजा-पाठ जैसे महत्वपूर्ण कामों से पहले पंचांग में तिथि, नक्षत्र और शुभ-अशुभ मुहूर्त देखे जाते हैं। पंचांग सूर्य, चंद्रमा और ग्रहों की स्थिति के आधार पर दिन की महत्वपूर्ण गणनाओं की जानकारी देता है। आइए जानते हैं 22 अगस्त 2026, शनिवार का पंचांग और दिन के प्रमुख शुभ-अशुभ समय।

दशमी तिथि के बाद शुरू होगी एकादशी

22 अगस्त को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि तड़के 2:00 बजे तक रहेगी। इसके बाद एकादशी तिथि शुरू हो जाएगी। शनिवार होने के कारण इस दिन भगवान विष्णु और शनिदेव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।

सूर्योदय और चंद्रोदय का समय

नई दिल्ली में शनिवार को सूर्योदय सुबह 6:09 बजे और सूर्यास्त शाम 6:50 बजे होगा। वहीं, चंद्रोदय दोपहर 2:51 बजे और चंद्रास्त रात 1:27 बजे होगा। पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य मघा नक्षत्र में स्थित रहेगा। वहीं, चंद्रमा दोपहर 2:50 बजे तक ज्येष्ठा नक्षत्र में रहेगा। इसके बाद चंद्रमा मूल नक्षत्र में प्रवेश करेगा।

अभिजीत मुहूर्त और अमृत काल

22 अगस्त को विष्कम्भ योग रहेगा। इस दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:04 बजे से 12:55 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अभिजीत मुहूर्त में शुभ कार्य करना विशेष फलदायी माना जाता है। वहीं, अमृत काल सुबह 4:55 बजे से 6:43 बजे तक रहेगा। इसे भी शुभ कार्यों के लिए अनुकूल समय माना जाता है।

राहुकाल में न करें शुभ कार्य

शनिवार को राहुकाल सुबह 9:19 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा। इसके अलावा गुलिक काल सुबह 6:09 बजे से 7:44 बजे तक और यमगंड काल दोपहर 2:04 बजे से 3:39 बजे तक रहेगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड में नए या महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।

सिंह राशि में सूर्य, वृश्चिक में चंद्रमा

ग्रहों की स्थिति की बात करें तो 22 अगस्त को सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेगा। नक्षत्र और ग्रहों की यह स्थिति दिन के पंचांग में महत्वपूर्ण मानी जाती है।

पूर्व दिशा में रहेगा दिशाशूल

शनिवार को पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिषीय और वास्तु मान्यताओं के अनुसार, दिशाशूल के दौरान संबंधित दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, यदि किसी कारण से पूर्व दिशा की यात्रा करना जरूरी हो, तो परंपरागत ज्योतिषीय उपाय अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।

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