पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आनंद बोस को जान से मारने की धमकी, कोलकाता के सॉल्ट लेक एरिया से आरोपित गिरफ्तार
कोलकाता, 9 जनवरी। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस को एक धमकी भरा ईमेल मिला, जिसमें लिखा था – ‘उसे उड़ा दूंगा’। धमकी भरे ईमेल भेजने के आरोपित व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। लोक भवन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि आरोपित को गुरुवार देर रात कोलकाता के निकट सॉल्ट लेक इलाके से पकड़ा गया।
धमकी देने वाले शख्स ने ईमेल में अपना मोबाइल नंबर भी लिखा था
लोकभवन के अधिकारी ने कहा कि गिरफ्तार व्यक्ति से मामले से जुड़ी और जानकारी हासिल करने के लिए पूछताछ की जा रही है। राज्यपाल बोस को गुरुवार रात जान से मारने की धमकी भरा ईमेल प्राप्त हुआ, जिसके बाद उनकी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि ईमेल भेजने वाले ने राज्यपाल को ‘विस्फोट से मार डालने’ की धमकी दी थी और उसने ईमेल में अपना मोबाइल नंबर भी लिखा था।
अधिकारी ने बताया कि बोस को ‘जेड-प्लस’ श्रेणी की सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है, अब लगभग 60-70 केंद्रीय बल उनकी सुरक्षा के लिए तैनात किए गए हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी इस बारे में सूचित कर दिया गया है। इस मामले की सूचना केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी दे दी गई है।
राज्यपाल बोस बोले – ‘धमकी मुझ पर असर नहीं करेगी’
वहीं राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने धमकी भरे ईमेल पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, ‘धमकियां आती-जाती रहती हैं, लेकिन कोई भी धमकी मुझ पर असर नहीं करेगी।’
ईडी के खिलाफ सीएम ममता की एफआईआर पर कोई टिप्पणी नहीं
सीएम ममता बनर्जी द्वारा ईडी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने पर उन्होंने कहा, ‘ये ऐसे मुद्दे हैं, जिनका राजनीतिक पहलू है। मैं राज्य की राजनीति पर टिप्पणी नहीं करना चाहता। ये कानूनी मामले हैं, जो अदालत में विचाराधीन हैं। अदालत को फैसला करने दीजिए। राज्यपाल होने के नाते, मैं ऐसे मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहता, जो विचाराधीन है।’
ईडी छापेमारी को लेकर राज्यपाल को 3 याचिकाएं और अभ्यावेदन प्राप्त
एक दिन पहले आई-पैक कार्यालय पर ईडी की छापेमारी के बारे में राज्यपाल ने कहा, ‘मुझे जनता से याचिकाएं और अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं। उन याचिकाओं में तीन कानूनी मुद्दे उठाए गए हैं। पहला, किसी लोक सेवक को उसके कर्तव्यों का निर्वहन करने से रोकना एक आपराधिक अपराध है। दूसरा, किसी लोक सेवक को उसके कर्तव्यों के निर्वहन में डराना या धमकाना एक गंभीर अपराध है। जिसके लिए दो साल की कैद और जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
राज्यपाल बोस ने कहा, ‘तीसरा अभ्यावेदन मुझे वकीलों द्वारा दिया गया है। तीसरा मुद्दा जो वे उठा रहे हैं, वह यह है कि एक संवैधानिक प्राधिकरण को संविधान की रक्षा करनी चाहिए। यदि ऐसा प्राधिकरण संविधान का उल्लंघन करता है, तो उस प्राधिकरण को उस पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है… मैं अभी जल्दबाजी में कोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहता।
