हम ट्रंप के हटने का करेंगे इंतजार…, जब ट्रेड डील को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री को अजीत डोभाल ने दिया था सख्त संदेश
नई दिल्ली, 5 फरवरी। भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बना तनाव अब लगभग समाप्त होता दिख रहा है, लेकिन इस समझौते तक पहुंचने से पहले दोनों देशों के रिश्तों में काफी तल्खी आ चुकी थी। टैरिफ को लेकर विवाद इतना बढ़ गया था कि भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने अमेरिका दौरे के दौरान तत्कालीन विदेश मंत्री मार्को रुबियो को कड़ा संदेश दे दिया था। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेड डील से कुछ महीने पहले वॉशिंगटन में हुई बैठक के दौरान डोभाल ने साफ कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों से भारत डरने वाला नहीं है।
उन्होंने यह तक कह दिया था कि अगर ट्रंप टैरिफ विवाद पर अड़े रहते हैं, तो भारत उनके कार्यकाल के खत्म होने तक इंतजार करने को तैयार है। डोभाल ने यह भी स्पष्ट किया था कि भारत दबाव में आकर कोई फैसला नहीं करेगा। उन्होंने रुबियो से कहा कि भारत दोनों देशों के बीच बढ़ी कड़वाहट को पीछे छोड़कर बातचीत फिर से शुरू करना चाहता है, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर हो रही आलोचना और दबाव से रिश्ते सुधरने की बजाय और बिगड़ेंगे।रिपोर्ट के अनुसार, डोभाल ने अमेरिकी पक्ष से आग्रह किया था कि यदि संबंधों को दोबारा पटरी पर लाना है तो बयानबाजी कम की जाए।
यह बैठक कथित तौर पर सितंबर की शुरुआत में हुई थी, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस और चीन के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात के तुरंत बाद मानी जा रही है।अब, उस बैठक के कई महीने बाद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कम टैरिफ और बढ़े हुए मार्केट एक्सेस के साथ नई ट्रेड डील का ऐलान किया है। भारत की ओर से भी टैरिफ कटौती से जुड़े हिस्से की पुष्टि की गई है, हालांकि रूसी तेल खरीद या अमेरिकी उत्पादों पर शून्य टैरिफ जैसी बातों पर कोई औपचारिक प्रतिबद्धता सामने नहीं आई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते का स्वागत करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि जब दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और सबसे बड़े लोकतंत्र मिलकर काम करते हैं, तो इससे लोगों को फायदा होता है और आपसी सहयोग के नए अवसर खुलते हैं। वहीं केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी इस समझौते को दोनों देशों के लिए “विन-विन डील” बताया है।कुल मिलाकर, कड़े रुख और लंबी बातचीत के बाद भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर सहमति बनी है, जिसने दोनों देशों के बीच बने तनाव को काफी हद तक कम कर दिया है।
