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अमेरिका व ईरान युद्ध के मुहाने पर खड़े, ईरान के लिए आज की रात भारी!

अमेरिका व ईरान युद्ध के मुहाने पर खड़े, ईरान के लिए आज की रात भारी!

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नई दिल्ली, 12 जनवरी। ईरान में महंगाई और कट्टरपंथ के खिलाफ जारी ‘Gen-Z’ आंदोलन ने अमेरिका और ईरान को युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। 500 से अधिक मौतों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सैन्य काररवाई की धमकी दी है जबकि ईरान इसे विदेशी साजिश बता रहा है। कुल मिलाकर दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है।

देखा जाए तो यदि अमेरिका व ईरान के बीच जंग छिड़ी तो इसका असर निश्चित रूप से पूरी दुनिया पर पड़ेगा। अब तक ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को महंगाई के खिलाफ लोगों के गुस्से के तौर पर देखा जा रहा था। लेकिन अब अमेरिका की एंट्री ने इस प्रदर्शन को ईरान बनाम अमेरिका बना दिया है।

ईरान पर किसी भी वक्त बमबारी शुरू कर सकता है अमेरिका

हालात ये हैं कि किसी भी वक्त अमेरिका, ईरान पर बमबारी शुरू कर सकता है। ऐसे में ईरान के लिए हर रात भारी पड़ रही है। अमेरिका का ये रुख, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ ईरान सरकार की सख्ती को लेकर है। इतिहास गवाह है कि जब भी ईरान की इस्लामिक व्यवस्था या उससे जुड़े कट्टरपंथी नियमों के खिलाफ आवाजें उठी हैं तो इन आवाज़ों को ईरान ने बंदूकों के दम पर ऐसे आंदोलनों को कुचल दिया है।

वर्ष 2022 में हिजाब कांड के बाद भी प्रदर्शनों में लगभग 500 लोग मारे गए थे

वर्ष 2022 में जब हिजाब के मामले में महसा अमीनी की मौत ने लोगों का गुस्सा भड़काया था, तब के प्रदर्शनों में करीब 500 लोग मारे गए थे। अबकी बार महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर हो रहे Gen-Z आंदोलन में अभी तक 544 लोग मारे जा चुके हैं।

ह्यूमन राइट्स एक्टिविट्स न्यूज एजेंसी का दावा है कि इस आंदोलन में अब तक 496 प्रदर्शनकारी और 48 सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं। यही नहीं, 10 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को ईरान ने हिरासत में रखा है। ईरान ने अपने यहां होने वाले विरोध प्रदर्शनों को अमेरिका और इजराइल की साजिश बताया है और अब तो वह अपने ही देश के प्रदर्शनकारी नागरिकों को आतंकवादी कहने लगा है।

ईरानी विदेश मंत्री ने प्रदर्शनकारियों को आतंकी करार दिया

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने विरोध प्रदर्शन करने वालों को आतंकवादी माना है। उनका कहना है कि प्रदर्शन कर रहे आतंकी सरकारी और प्राइवेट संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं और ये लोग ईरान के सुरक्षा बलों और आम लोगों को भी टारगेट कर रहे हैं। उनका दावा है कि ईरान सरकार के पास ऐसे कई वीडियो हैं, जिनमें दिख रहा है कि प्रदर्शनकारियों को हथियार बांटे गए और हथियारों के जरिए ईरान को गृहयुद्ध में झोंकने की साजिश की गई। उन्होंने सोशल मीडिया पर इससे जुड़े वीडियो भी शेयर किए हैं, जिनमें प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हो रही है।

ईरानी राष्ट्रपति मसूद बोले – दंगे भड़काने के पीछे अमेरिका व इजराइल

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी कह रहे हैं कि ईरान में दंगे भड़काने के पीछे अमेरिका और इजराइल का हाथ है। उनका आरोप है कि अमेरिका और इजराइल मिलकर ईरान में अराजकता फैला रहे हैं। उन्होंने प्रदर्शन करने वाले ईरानी नागरिकों को चेतावनी दी है कि वे बातचीत की टेबल पर आएं, क्योंकि ईरान सरकार दंगाइयों को बर्दाश्त नहीं करेगी।

इन बयानबाज़ियों के बीच ईरान की संसद का एक वीडियो वायरल है, जिसमें सदन के अंदर ईरान के नेता अमेरिका के विरोध में नारे लगा रहे हैं। यह प्रतिक्रिया अमेरिका के उस रुख पर आई, जिसमें कहा जा रहा था कि अमेरिका कभी भी ईरान पर बमबारी कर सकता है। ईरान की संसद में “Death To America” के नारे लगाए गए।

Gen-Z आंदोलन के बहाने सत्ता पलटने की कोशिश में जुटा है अमेरिका

ईरान में हो रहे प्रदर्शन अमेरिका के लिए एक सुनहरा मौका है। वह Gen-Z आंदोलन के बहाने ईरान की मौजूदा राजनीतिक सत्ता को पलटने की कोशिश में लगा हुआ है। गत 28 दिसम्बर से चल रहे इस आंदोलन को अमेरिकी राष्ट्रपति का समर्थन मिला है। वे प्रदर्शनकारियों को पूरी मदद का भरोसा दे रहे हैं।

अमेरिकी सेना तैयार और बटन डोनाल्ड ट्रंप के हाथों

ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका अब एक मौके की तलाश में है। वह ईरान पर हमला करने की रणनीति तैयार कर चुका है। ये खबरें एक खास मीटिंग के बाद सामने आई हैं, जिसमें ट्रंप को ईरान पर हमले के तरीकों से जुड़ी ब्रीफिंग दी गई थी।

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी अधिकारियों ने राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान पर संभावित हमलों से जुड़े रणनीतिक विकल्प बताए हैं। ऐसा माना जा रहा है कि अब डोनाल्ड ट्रंप को फैसला करना है कि ईरान पर हमला कब और किस तरह से किया जाए। यानी अमेरिकी सेना तैयार है और बटन डोनाल्ड ट्रंप के हाथों में है।

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