लखनऊ, 17 अक्टूबर। शारदीय नवरात्र के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि दुष्ट शक्तियों का विनाश करने वाली और अपने भक्तों को भय से मुक्ति दिलाने वाली देवी हैं। उनका स्वरूप भले ही उग्र हो, लेकिन वे अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाती हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से मां कालरात्रि की पूजा करने से साहस, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है। इस दिन मां को गुड़ और गुड़ से बनी मिठाइयों का भोग लगाने की परंपरा है।
नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा के दौरान भक्त मंत्रों का जाप करते हैं और आरती करके परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करते हैं। आइए जानते हैं मां कालरात्रि पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, प्रिय भोग, मंत्र, ध्यान मंत्र, स्तोत्र और आरती।
मां कालरात्रि पूजा 2026: शुभ मुहूर्त
पंचांग में दी गई जानकारी के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर 2026 को सुबह 5 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। तिथि की इस अवधि के कारण सप्तमी दो कैलेंडर दिनों में पड़ रही है। ऐसे में नवरात्रि की पूजा के लिए स्थानीय पंचांग और क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार तिथि निर्धारित करना उचित है।
17 अक्टूबर 2026 के प्रमुख मुहूर्त:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:52 बजे से 5:40 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक
अमृत काल का समय उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है। पूजा का समय तय करने से पहले अपने क्षेत्र के पंचांग से मुहूर्त की पुष्टि अवश्य करें।
मां कालरात्रि का स्वरूप और धार्मिक महत्व
मां कालरात्रि को मां दुर्गा का सातवां स्वरूप माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में उनका वर्ण श्याम यानी काला बताया गया है। उनके बाल खुले रहते हैं और वे गर्दभ यानी गधे पर सवार रहती हैं। उनके स्वरूप का वर्णन लंबे होंठ, कानों में आभूषण और शरीर पर तेल का लेप होने के साथ किया गया है। उनके बाएं पैर में लोहे के कांटों जैसे आभूषण सुशोभित बताए जाते हैं।
मां कालरात्रि का स्वरूप उग्र और शक्तिशाली माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में उन्हें दुष्ट शक्तियों का संहार करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। नवरात्रि के सातवें दिन उनकी आराधना कर भक्त भय, नकारात्मकता और जीवन की बाधाओं से मुक्ति की कामना करते हैं। मां से साहस, आत्मविश्वास, परिवार की सुख-शांति और कल्याण का आशीर्वाद मांगा जाता है।
मां कालरात्रि की पूजा विधि
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा करने के लिए सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल को साफ करें। इसके बाद विधि-विधान से पूजा आरंभ करें।
- कलश पूजन: यदि घर में कलश स्थापना की गई है, तो सबसे पहले कलश की पूजा करें।
- दीपक जलाएं: मां कालरात्रि की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर उनका ध्यान करें।
- पूजा सामग्री अर्पित करें: मां को रोली, अक्षत, फूल और माला अर्पित करें।
- भोग लगाएं: मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बनी मिठाइयों का भोग लगाएं।
- मंत्र जाप करें: श्रद्धा के साथ मां के मंत्रों का जाप करें। इच्छानुसार दुर्गा सप्तशती का पाठ भी कर सकते हैं।
- आरती करें: पूजा के अंत में मां कालरात्रि की आरती करें और परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य तथा कल्याण की प्रार्थना करें।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां की पूजा श्रद्धा और एकाग्रता के साथ करनी चाहिए।
मां कालरात्रि को किस चीज का भोग लगाएं?
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि को गुड़ और गुड़ से बनी मिठाइयों का भोग लगाने की परंपरा है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार गुड़ से तैयार पकवान भी अर्पित कर सकते हैं।
मान्यता है कि मां को भोग लगाने और सच्चे मन से आराधना करने से जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है। पूजा के बाद भोग को प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों में बांटा जा सकता है।
मां कालरात्रि का प्रार्थना मंत्र
मां कालरात्रि की पूजा के दौरान उनके स्वरूप का ध्यान करते हुए इस प्रार्थना मंत्र का जाप किया जाता है।
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोह लताकण्टकभूषणा।
वर्धन मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
मां कालरात्रि का स्तुति मंत्र
मां कालरात्रि की स्तुति के लिए इस मंत्र का जाप किया जाता है।
या देवी सर्वभूतेषु मां कालरात्रि रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
भक्त इस मंत्र का जाप करते हुए मां से भय दूर करने, संकटों का सामना करने की शक्ति और जीवन में शांति बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।
मां कालरात्रि का ध्यान मंत्र
पूजा के दौरान मां कालरात्रि का ध्यान करने के लिए इस ध्यान मंत्र का पाठ किया जाता है।
करालवन्दना घोरां मुक्तकेशी चतुर्भुजाम्।
कालरात्रिम् करालिंका दिव्याम् विद्युतमाला विभूषिताम्॥
दिव्यम् लौहवज्र खड्ग वामोघोर्ध्व कराम्बुजाम्।
अभयम् वरदाम् चैव दक्षिणोध्वाघः पार्णिकाम् मम्॥
महामेघ प्रभाम् श्यामाम् तक्षा चैव गर्दभारूढ़ा।
घोरदंश कारालास्यां पीनोन्नत पयोधराम्॥
सुख पप्रसन्न वदना स्मेरान्न सरोरूहाम्।
एवम् सचियन्तयेत् कालरात्रिम् सर्वकाम् समृध्दिदाम्॥
मां कालरात्रि स्तोत्र
मां कालरात्रि की आराधना के दौरान भक्त इस स्तोत्र का पाठ भी करते हैं।
हीं कालरात्रि श्रीं कराली च क्लीं कल्याणी कलावती।
कालमाता कलिदर्पध्नी कमदीश कुपान्विता॥
कामबीजजपान्दा कमबीजस्वरूपिणी।
कुमतिघ्नी कुलीनर्तिनाशिनी कुल कामिनी॥
क्लीं ह्रीं श्रीं मन्त्र्वर्णेन कालकण्टकघातिनी।
कृपामयी कृपाधारा कृपापारा कृपागमा॥
मां कालरात्रि की आरती
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा के बाद उनकी आरती करने की परंपरा है। भक्त आरती के माध्यम से मां की महिमा का गुणगान करते हैं।
कालरात्रि जय-जय महाकाली। काल के मुंह से बचानेवाली॥
दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा। महाचंडी तेरा अवतारा॥
पृथ्वी और आकाश पे सारा। महाकाली है तेरा पसारा॥
खड्ग खप्पर रखनेवाली। दुष्टों का लहू चखनेवाली॥
कलकत्ता स्थान तुम्हारा। सब जगह देखूं तेरा नजारा॥
सभी देवता सब नर-नारी। गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥
रक्तदंता और अन्नपूर्णा। कृपा करे तो कोई भी दुख ना॥
ना कोई चिंता रहे बीमारी। ना कोई गम ना संकट भारी॥
उस पर कभी कष्ट ना आवे। महाकाली मां जिसे बचावे॥
तू भी भक्त प्रेम से कह। कालरात्रि मां तेरी जय॥
मां कालरात्रि पूजा का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि की आराधना भय और नकारात्मकता से मुक्ति की कामना के लिए की जाती है। नवरात्रि के सातवें दिन भक्त मां के मंत्रों का जाप, पूजा और आरती करके अपने परिवार के कल्याण की प्रार्थना करते हैं। मां कालरात्रि का स्वरूप यह संदेश देता है कि कठिन परिस्थितियों का सामना साहस और दृढ़ संकल्प के साथ करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं, परंपराओं और उपलब्ध पंचांग संबंधी जानकारी पर आधारित है। पूजा की तिथि और शुभ मुहूर्त में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है। सही समय की पुष्टि के लिए स्थानीय पंचांग देखें।


