वक्फ बिल पर JPC रिपोर्ट पेश होते ही संसद में हंगामा, खरगे राज्यसभा में बोले – ‘इस फर्जी रिपोर्ट को हम कभी नहीं मानेंगे’

नई दिल्ली, 12 फरवरी। वक्फ संशोधन बिल पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की रिपोर्ट गुरुवार को संसद के दोनों सदनों में पेश की गई। लेकिन विपक्षी सदस्यों ने इसकी खामियों को लेकर हंगामा खड़ा कर दिया।

डिसेंट नोट के साथ फिर से रिपोर्ट पेश करने की मांग

उच्च सदन में तो विपक्ष ने डिसेंट नोट को रिपोर्ट उसका हिस्सा नहीं बनाने पर जबर्दस्त हंगामा किया। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने तो दो टूक कह दिया कि वह इस फर्जी रिपोर्ट को नहीं मानेंगे। उन्होंने सभापति जगदीप धनखड़ से इस रिपोर्ट को खारिज करने का अनुरोध किया और डिसेंट नोट के साथ फिर से रिपोर्ट को पेश करने की मांग की।

नड्डा ने गैर-जिम्मेदाराना बता विपक्ष के रवैये की निंदा की

दरअसल, राज्यसभा में वक्फ संशोधन बिल पर जेपीसी की रिपोर्ट पेश होते ही विपक्ष के सदस्य नारेबाजी करने लगे। सभापति ने हंगामा कर रहे सदस्यों को बार-बार समझाने की कोशिश की, लेकिन तब भी हंगामा नहीं रुका तो सदन की कार्यवाही 11 बजकर 20 मिनट तक के लिए स्थगित कर दी। सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो फिर हंगामा होने लगा। इस दौरान सभापति ने सदन के नेता जेपी नड्डा को बोलने की अनुमति दी। नड्डा ने विपक्ष के रवैये को गैरजिम्मेदार बताते हुए उसकी निंदा की।

नड्डा ने कहा, ‘हमें परंपराओं का ध्यान रखना चाहिए और संवैधानिक प्रावधान के तहत प्रजातांत्रिक तरीके से सदन की कार्यवाही चलानी चाहिए। मुझे दुख है कि सभापति के बार-बार अनुरोध के बाद भी हंगामा हो रहा। विपक्ष का रवैया बहुत ही गैरजिम्मेदाराना है, जितनी भी निंदा की जाए कम है।’

जब खरगे से बोले सभापति – ‘आपको गुस्सा आएगा तो मुझे परेशानी होगी’

इसके बाद सभापति ने विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे का नाम बोलने के लिए पुकारा। इस दौरान विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी था। तब सभापति धनखड़ ने विपक्ष के तीन सदस्यों का नाम लेकर कहा कि इन्होंने सदन में अव्यवस्था की और हंगामा किया। इस पर इस पर खरगे विरोध जताते रहे और बोलते रहे। इस पर सभापति धनखड़ ने खरगे से हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, ‘आपको गुस्सा नहीं आना चाहिए, आपको गुस्सा आएगा तो मुझको परेशानी होगी।’

डिसेंट नोट को हटाना निंदनीय और अलोकतांत्रिक : खरगे

खरगे ने वक्फ बिल पर जेपीसी रिपोर्ट से विपक्षी सदस्यों के डिसेंट नोट को हटाने और नॉन-स्टेक होल्डर्स की राय लिए जाने पर कड़ी आपत्ति दर्द कराई। उन्होंने कहा, ‘हमारा एक ही विषय है, जो वक्फ बोर्ड की जेपीसी की रिपोर्ट है, जिस रिपोर्ट में अनेक सदस्यों ने अपना डिसेंट नोट दिया है। वो नोट देने के बावजूद भी प्रोसिडिंग से निकालना और सिर्फ मैजॉरिटी मेंबर्स के व्यूज को सिर्फ रखना ठीक नहीं है। ये निंदनीय है। अलोकतांत्रिक हैं और प्रक्रियाओं के खिलाफ है।’

खरगे ने आगे कहा, ‘नॉन-स्टेकहोल्डर्स को, बाहर से बुला-बुलाकर उन लोगों को खड़ा करना और उनका स्टेटमेंट ले रहे हैं और इतने लोग जो विपक्ष के डिसेंट नोट दिए हैं, क्या उनमें से कोई पढ़ा लिखा नहीं है…मेरे को बड़ा ताज्जुब लग रहा है कि अगर आपको कुछ करना भी है आपको डिसेंट नोट को प्रिंट करके या अपनी रिपोर्ट में डालकर बोलना चाहिए। इसके बजाय उसे डिलीट करके अगर कोई रिपोर्ट होती है तो मैं उसकी निंदा करता हूं। ऐसे फर्जी रिपोर्ट को हम कभी नहीं मानेंगे।’

डिसेंट नोट को शामिल करके फिर पेश हो जेपीसी रिपोर्ट

विपक्ष के नेता ने जेपीसी रिपोर्ट को डिसेंट नोट के साथ फिर से पेश किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा, ‘जब प्रोसीजर फॉलो नहीं होती तो वो इस हाउस का पार्ट नहीं हो सकता। इसलिए अनुरोध है कि जो भी रिपोर्ट है और उसमें डिसेंट नोट नहीं है तो उसे वापस भेजिए…डिसेंट नोट को डालकर फिर पेश हो।…ये किसी व्यक्ति का सवाल नहीं है। जो सांसद आक्रोशित हैं, वो अपने लिए नहीं, पूरे समाज के लिए आक्रोशित हैं, जिन पर अन्याय हो रहा है, उस पर आक्रोशित हैं।’

खरगे ने सभापति जगदीप धनखड़ से मांग की कि वह जेपीसी रिपोर्ट को लौटा दें और उसे डिसेंट नोट के साथ फिर से पेश करवाएं। उन्होंने कहा, ‘आप जेपीसी रिपोर्ट को रिफ्यूज कर सकते हैं। न जाने कितने गवर्नर ऐसा कर चुके हैं। आप डिसेंट नोट को रिपोर्ट में डलवाइए और तब तक इसे वापस भेजिए।’

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