लखनऊ, 3 सितम्बर। उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने गुरुवार को समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के खास चुनावी नारे PDA (जिसका मतलब है पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) पर तंज कसा।
P का मतलब पहली हार 2017, D का मतलब दूसरी हार 2022 और A का मतलब अबकी 2027 में भी हार
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) प्रमुख राजभर ने अगले वर्ष प्रस्तावित उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष की चुनावी रणनीति का मजाक उड़ाते हुए, राजभर ने इस शॉर्ट-फॉर्म का व्यंग्यात्मक मतलब बताया। इसके जरिए उन्होंने समाजवादी पार्टी की पिछली चुनावी हार को उजागर किया और भविष्य में भी हार की भविष्यवाणी की।
- P : 2017 में पहली बार हार (पहली बार 2017 में हारे)।
- D : 2022 में दूसरी बार हार (दूसरी बार 2022 में हारे)।
- A : इस बार 2027 में हार (अबकी बार 2027 में भी हारेंगे)।
अखिलेश यादव की सोशल मीडिया रणनीति की पहचान है PDA फॉर्मूला
ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि पीडिए फॉर्मूला अखिलेश यादव की सोशल मीडिया रणनीति का खास हिस्सा रहा है, जिसका मकसद सत्ताधारी भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के खिलाफ पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों को एकजुट करना है।
इस फॉर्मूले का अक्सर मजाक उड़ाते रहते हैं राजभर
हालांकि राजभर एनडीए के दूसरे नेताओं के साथ मिलकर अखिलेश के इस फॉर्मूले पर लगातार हमले किए हैं। राजभर ने अक्सर दावा किया है कि पीडीए गठबंधन में अंदरूनी मतभेद हैं। एक बार उन्होंने मजाक में कहा था कि इन अक्षरों का मतलब ‘पार्टी ऑफ डिंपल एंड अखिलेश’ है या फिर मजाक उड़ाते हुए इसका मतलब ‘पीट देगा अहीर’ बताया था।
राजभर ने सपा प्रमुख की महत्वाकांक्षाओं को चुनौती दी
दरअसल, जैसे-जैसे 2027 के राज्य चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ रही है, राजभर ने सपा प्रमुख की महत्वाकांक्षाओं को चुनौती देते हुए कहा कि विपक्ष सत्ता में लौटने में नाकाम रहेगा और अखिलेश यादव को अपनी पार्टी के आधार को बचाने की चिंता करनी चाहिए।
इस वर्ष जून में भी राजभर ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया था कि राज्यभर में दलितों के खिलाफ अत्याचार के लिए मुख्य रूप से सपा के समर्थक ही जिम्मेदार हैं। ‘X’ पर राजभर ने सपा के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नारे पर तंज कसा था और मजाक में इसका नया मतलब बताते हुए दावा किया था कि यह कुछ खास समुदायों द्वारा दलितों के खिलाफ हिंसा को दर्शाता है।


