वॉशिंगटन, 5 सितंबर। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने दोनों देशों के बीच चल रही सैन्य कार्रवाई को पूर्ण युद्ध मानने से इनकार करते हुए इसे ‘सैन्य संघर्ष’ बताया। उन्होंने इस टकराव को अमेरिका के लिए अपेक्षाकृत मामूली बताते हुए संकेत दिया कि अमेरिकी सेना आने वाले दिनों में ईरान के नतांज परमाणु संयंत्र के पास स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माउंट कलांग को निशाना बना सकती है।
नतांज के पास सुरक्षित ठिकाना बना संभावित लक्ष्य
ट्रंप के बयान के मुताबिक अमेरिका की अगली कार्रवाई माउंट कलांग पर हो सकती है। यह स्थान ईरान के प्रमुख नतांज यूरेनियम संवर्धन संयंत्र के नजदीक स्थित बताया जाता है। पहाड़ी इलाके में भूमिगत सुरंगों और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था वाले ठिकाने को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के भूमिगत ठिकानों का इस्तेमाल संवेदनशील सैन्य गतिविधियों, मिसाइल प्रणालियों और कमांड सेंटरों के लिए किया जा सकता है। हालांकि, माउंट कलांग से जुड़ी गतिविधियों और संभावित सैन्य लक्ष्य के बारे में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी सीमित है।
ट्रंप बोले- ‘यह युद्ध नहीं, सैन्य संघर्ष है’
पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने ईरान के साथ जारी टकराव को युद्ध की संज्ञा देने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि कई लोग इसे युद्ध नहीं कहते और वह इसे ‘सैन्य संघर्ष’ मानते हैं। ट्रंप ने इस संघर्ष को अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती नहीं बताया और इसकी तुलना अतीत के बड़े युद्धों से करते हुए अपने रुख का बचाव किया।
ट्रंप ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में हुए नुकसान का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान के साथ संघर्ष में अब तक 18 अमेरिकी लोगों की जान गई है, जबकि वियतनाम युद्ध में अमेरिका को बहुत बड़ी संख्या में सैनिकों की जान गंवानी पड़ी थी।
- जेडी वेंस ने भी दिए आक्रामक संकेत
ट्रंप से पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी ईरान में चल रहे अमेरिकी सैन्य अभियानों को लेकर इसी तरह की टिप्पणी कर चुके हैं। उन्होंने भी इसे पारंपरिक युद्ध के बजाय सैन्य संघर्ष के रूप में पेश किया था।
राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के बयानों से संकेत मिलता है कि अमेरिकी प्रशासन ईरान पर सैन्य दबाव बनाए रखने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। यदि नतांज के आसपास किसी रणनीतिक ठिकाने को निशाना बनाया जाता है, तो इससे अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ने के साथ पूरे पश्चिम एशिया में स्थिति गंभीर होने की आशंका है।


