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TMS सांसद कल्याण बनर्जी ने महुआ मोइत्रा से टकराव के बीच लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक पद से दिया इस्तीफा

TMS सांसद कल्याण बनर्जी ने महुआ मोइत्रा से टकराव के बीच लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक पद से दिया इस्तीफा

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नई दिल्ली, 4 अगस्त। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी ने अपनी सहयोगी महुआ मोइत्रा के साथ विवाद और कीर्ति आजाद से झगड़े के बीच सोमवार को लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक (चीफ ह्विप) पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे की घोषणा पार्टी प्रमुख की अध्यक्षता में हुई टीएमसी सांसदों की एक वर्चुअल बैठक में हिस्सा लेने की बाद की।

सांसदों में समन्वय की कमी के लिए मुझे गलत तरीके से दोषी ठहराया जा रहा

कल्याण बनर्जी ने चीफ ह्विप पद से इस्तीफा देने के बाद आरोप लगाया कि सांसदों के बीच समन्वय की कमी के लिए उन्हें गलत तरीके से दोषी ठहराया जा रहा है। यह कदम पार्टी सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अध्यक्षता में टीएमसी सांसदों की एक वर्चुअल बैठक के कुछ घंटों बाद सांसद ने उठाया है।

उन्होंने कहा, ‘मैंने लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा दे दिया है क्योंकि दीदी (ममता बनर्जी) ने वर्चुअल बैठक के दौरान कहा था कि पार्टी सांसदों के बीच समन्वय की कमी है। इसलिए दोष मुझ पर है। इसके बाद मैंने पद छोड़ने का फैसला किया है।’ उन्होंने कहा कि वह इस बात से अपमानित महसूस कर रहे हैं कि पार्टी अनुशासनहीनता और कम उपस्थिति के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह नहीं ठहरा रही है, बल्कि उन्हें ही दोषी ठहराया जा रहा है।

टीएमसी के कई सांसद लोकसभा भी नहीं आते, इसमें मेरा क्या कसूर?’

टीएमसी सांसद ने कहा कि जिन्हें ममता बनर्जी ने सांसद बनाया है, वे लोकसभा भी नहीं आते। दक्षिण कोलकाता, बैरकपुर, बांकुरा, उत्तर कोलकाता के टीएमसी सांसदों में से शायद ही कोई संसद आता है। मैं क्या कर सकता हूं? मेरा क्या कसूर है? मुझे ही हर चीज के लिए दोषी ठहराया जा रहा है।

कृष्णानगर सांसद मोइत्रा पर उन्हें अपशब्द कहने का लगाया आरोप

देखा जाए तो कृष्णानगर की सांसद महुआ मोइत्रा के साथ कल्याण बनर्जी के लगातार टकराव और पूर्व क्रिकेटर व टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद के साथ उनके पहले के सार्वजनिक विवाद ने पार्टी नेतृत्व को काफी शर्मिंदा किया है। अपने इस्तीफे से ठीक पहले कल्याण बनर्जी ने ‘एक्स पर पोस्ट करके मोइत्रा पर एक पॉडकास्ट के दौरान उन्हें अपशब्द कहने का आरोप लगाया। उन्होंने इस्तीफे के बाद X पर लिखा, ‘यदि ऐसी भाषा किसी महिला के लिए इस्तेमाल की जाती, तो पूरे देश में आक्रोश फैल जाता और यह सही भी है। लेकिन जब कोई पुरुष निशाना होता है, तो उसे नजरअंदाज कर दिया जाता है।’

एक पॉडकास्ट के दौरान महुआ ने कल्याण क तुलना सुअर से की

बनर्जी ने लिखा, “मैंने महुआ मोइत्रा द्वारा हाल ही में एक सार्वजनिक पॉडकास्ट में की गई व्यक्तिगत टिप्पणियों पर ध्यान दिया है। उनके शब्दों का चयन, जिसमें एक सांसद की तुलना ‘सुअर’ जैसे अमानवीय शब्दों से करना शामिल है, न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि ये सभ्य संवाद के बुनियादी नियमों की गहरी अवहेलना को दिखाता है।”

जनप्रतिनिधि के मुंह से घटिया भाषा

टीएमसी सांसद ने आगे कहा, ‘जो लोग सोचते हैं कि गालियों से मुद्दों को दबाया जा सकता है, उन्हें अपनी राजनीति पर गंभीरता से सोचना चाहिए — क्योंकि इससे उनकी सोच और कामकाज की खोखलाहट सामने आती है। जब कोई जनप्रतिनिधि इस तरह की घटिया भाषा और इशारों पर उतर आए तो यह ताकत नहीं बल्कि उनकी असुरक्षा को दर्शाता है।’

आलोचना करना महिला विरोधी नहीं

कल्याण बनर्जी ने कहा, “मैं साफ कर दूं –  मैंने जो भी कहा, वो सार्वजनिक जवाबदेही और निजी आचरण से जुड़े सवाल थे – और हर सार्वजनिक व्यक्ति, चाहे वो पुरुष हो या महिला, इन सवालों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। यदि ये बातें किसी को असहज लगती हैं, तो इसका मतलब ये नहीं कि सही आलोचना को ‘महिला विरोध’ कहकर बचा जाए।”

किसी पुरुष सहयोगी को यौन कुंठित कहना साहस नहीं, बल्कि सीधी गाली

बनर्जी ने आगे कहा, “किसी पुरुष सहयोगी को ‘यौन कुंठित’ कहना साहस नहीं, बल्कि सीधी गाली है। यदि यही बात किसी महिला के लिए कही जाती, तो देशभर में आक्रोश होता — और वो बिलकुल जायज होता। लेकिन जब पुरुष को निशाना बनाया जाता है तो लोग इसे नज़रअंदाज कर देते हैं या ताली बजाते हैं। हमें साफ समझना होगा — गाली, गाली होती है — चाहे वो किसी के लिए भी हो। इस तरह के शब्द सिर्फ अशोभनीय नहीं बल्कि ये दोहरे मापदंड भी दिखाते हैं, जहां पुरुषों से उम्मीद की जाती है कि वो चुपचाप सहें।’

मोइत्रा को दी चेतावनी

उन्होंने कहा कि यदि महुआ मोइत्रा सोचती हैं कि इस तरह की गाली-गलौज से वो अपने असफल कामकाज को छुपा लेंगी या गंभीर सवालों से ध्यान भटका लेंगी, तो वह भ्रम में हैं। जो लोग जवाब देने की बजाय अपशब्दों का सहारा लेते हैं, वो लोकतंत्र के रक्षक नहीं बल्कि उसकी बदनामी हैं — और देश की जनता इस नाटक को अच्छी तरह समझती है।

राजनीति छोड़ने पर कर रहा हूं विचार

कल्याण बनर्जी ने कहा, ‘दीदी कहती हैं कि लोकसभा सांसद झगड़ रहे हैं। क्या मुझे उन लोगों को बर्दाश्त करना चाहिए, जो मुझे गाली देते हैं? मैंने पार्टी को सूचित किया, लेकिन जिस व्यक्ति ने मेरा अपमान किया, उसके खिलाफ काररवाई करने के बजाय, वे मुझे ही दोषी ठहरा रहे हैं। ममता बनर्जी को पार्टी को अपने हिसाब से चलाने दें। मैं इतना परेशान हूं कि राजनीति छोड़ने के बारे में भी सोच रहा हूं।’

अभिषेक बनर्जी ने कुछ दिन और पद पर बने रहने का किया अनुरोध

इस बीच कल्याण बनर्जी ने देर शाम हुए एक घटनाक्रम के बाद कहा कि उन्हें टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का फोन आया। अभिषेक ने उनसे कुछ और दिनों तक मुख्य सचेतक के रूप में बने रहने का अनुरोध किया है। साथ ही सात अगस्त को मिलने की बात कही है।

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