गोवा नाइट क्लब अग्निकांड : थाईलैंड से भारत लाए गए लूथरा बंधु, BNS की कई धाराओं में होगी काररवाई
नई दिल्ली, 16 दिसम्बर। गोवा के चर्चित नाइट क्लब अग्निकांड के मुख्य आरोपितों लूथरा बंधुओं – गौरव और सौरभ को थाईलैंड से मंगलवार भारत लाया गया। दोनों कड़ी सुरक्षा के बीच दोपहर लगभग 1.45 बजे इंडिगो की फ्लाइट से दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे। लूथरा बंधु उस नाइटक्लब के सह मालिक हैं, जहां गत छह दिसम्बर 2025 को भीषण आग लगी थी। हादसे में 25 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी।
गोवा ले जाने की तैयारी
दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरते ही ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद दोनों भाइयों को देर रात गोवा ले जाया जाएगा। गोवा पहुंचते ही उन्हें सीधे अंजुना पुलिस स्टेशन ले जाया जाएगा, जहां उनसे आग लगने की घटना और क्लब प्रबंधन से जुड़े सवालों पर पूछताछ होगी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि पूछताछ में कई नए खुलासे हो सकते हैं। इस केस में अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
बुधवार को कोर्ट में पेशी संभव
पुलिस के अनुसार आरोपितों को 17 दिसम्बर को मापुसा मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया जा सकता है। कोर्ट में रिमांड और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर फैसला होगा। पुलिस इस दौरान क्लब की फायर सेफ्टी व्यवस्था और इवेंट मैनेजमेंट से जुड़े दस्तावेज पेश कर सकती है। कोर्ट की अनुमति मिलने पर पुलिस कस्टडी रिमांड भी मांगी जा सकती है।
हादसे के कुछ घंटों बाद ही दोनों भाई फुकेट भाग गए थे
उल्लेखनीय है कि छह दिसम्बर को मध्यरात्रि के आसपास हुए हादसे के कुछ घंटों बाद ही दोनों आरोपित मुंबई से थाईलैंड के फुकेट के लिए रवाना हो गए थे। गोवा पुलिस ने उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया था। इसके बाद इंटरपोल ने ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया था। विदेश मंत्रालय ने दोनों के पासपोर्ट निलंबित कर दिए थे। आखिरकार थाईलैंड में उन्हें डिटेन किया गया और औपचारिकताओं के बाद भारत लाया गया।
आरोप सिद्ध हुआ तो कई वर्षों तक हो सकती है जेल की सजा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार लूथरा बंधुओं पर एफआईआर में बीएनएस की 105, 125 व 287 सहित अन्य धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस का मानना है कि मालिक, प्रबंधक और आयोजनकर्ताओं की सामूहिक लापरवाही से यह हादसा हुआ। यदि आरोप साबित हुआ तो सजा और भी कड़ी हो सकती है। यदि कोर्ट यह मानता है कि लूथरा ब्रदर्स की लापरवाही जानलेवा थी तो लंबी जेल या आजीवन कारावास तक का खतरा बन सकता है। धारा 105 और 287 जैसी धाराएं साथ लगने पर कुल सजा कई वर्षों तक जा सकती है। जुर्माने का बोझ भी अलग से लगेगा। यह सब कोर्ट में पेश सबूतों पर निर्भर करेगा।
