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अदाणी यूनिवर्सिटी में ‘ड्रोबोटिक्स कॉन्क्लेव 2026’ ने दिखाया भारत के इंटेलिजेंस सिस्टम का भविष्य

अदाणी यूनिवर्सिटी में ‘ड्रोबोटिक्स कॉन्क्लेव 2026’ ने दिखाया भारत के इंटेलिजेंस सिस्टम का भविष्य

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अहमदाबाद, 31 जनवरी। अदाणी यूनिवर्सिटी ने शनिवार को यहां संपन्न दो दिवसीय ड्रोबोटिक्स कॉन्क्लेव 2026 का सफल आयोजन कर देशभर के तकनीकी, शैक्षणिक और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को एक साझा मंच पर लाकर खड़ा किया। इस राष्ट्रीय स्तर के कॉन्क्लेव का फोकस रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोनॉमस सिस्टम्स पर रहा।

देश के कई हिस्सों से आए 279 प्रतिभागियों की रही भागीदारी

देश के कई हिस्सों से आए 279 प्रतिभागी इस कॉन्क्लेव में मौजूद रहे, जिनमें शिक्षाविद, उद्योग विशेषज्ञ, स्टार्ट-अप लीडर्स, रिसरचर्स, पॉलिसी मेकर्स और छात्र शामिल थे। आयोजन का उद्देश्य उभरती तकनीकों में नवाचार, स्किल-डेवलपमेंट और स्टार्ट-अप अवसरों पर गंभीर विमर्श को बढ़ावा देना रहा।

कॉन्क्लेव का टाइटल स्पॉन्सर अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस

अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस इस कॉन्क्लेव का टाइटल स्पॉन्सर रहा। इसके अलावा आयोजन को गुजरात काउंसिल ऑन साइंस एंड टेक्नोलॉजी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, गुजरात सरकार, आईईई गुजरात सेक्शन और स्टूडेंट स्टार्ट-अप एंड इनोवेशन पॉलिसी का सहयोग मिला।

अदाणी ग्रुप के चीफ ट्रांसफॉर्मेशन ऑफिसर सुदीप्त भट्टाचार्य रहे चीफ गेस्ट

उद्घाटन सत्र में प्रो. धवल पुजारा, प्रोवोस्ट, अदाणी यूनिवर्सिटी ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि ऑटोमेशन और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के दौर में युवाओं और संस्थानों को भविष्य के लिए तैयार रहना होगा। इस अवसर पर अदाणी ग्रुप के चीफ ट्रांसफॉर्मेशन ऑफिसर सुदीप्त भट्टाचार्य मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने रक्षा, मैन्युफैक्चरिंग और राष्ट्रीय विकास में रोबोटिक्स और ड्रोन टेक्नोलॉजी की रणनीतिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए युवा इनोवेटर्स के लिए मौजूद अवसरों के बारे में बताया।

 

कार्यक्रम में आईआईटी बॉम्बे के प्रो. कवी आर्य, ई-यंत्रा पहल के संस्थापक और प्रमुख रिसर्चर, गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में शामिल हुए। उन्होंने एक्सपेरिमेंटल लर्निंग, इंजीनियरिंग क्षमताओं के निर्माण और बड़े पैमाने पर इनोवेशन की आवश्यकता पर जोर दिया।

‘रोबोटिक्स और ड्रोन में इनोवेशन एवं स्टार्ट-अप इकोसिस्टम’ विषय पर पैनल चर्चा

पहले दिन का प्रमुख आकर्षण रहा ‘रोबोटिक्स और ड्रोन में इनोवेशन एवं स्टार्ट-अप इकोसिस्टम’ विषय पर पैनल चर्चा, जिसका संचालन प्रो. कवी आर्य ने किया। पैनल में उद्योग और स्किलिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों ने स्टार्ट-अप अवसरों, वर्कफोर्स की जरूरतों, इंडस्ट्री चुनौतियों और रिसर्च को व्यावसायिक समाधान में बदलने के रास्तों पर विचार साझा किए। प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी ने चर्चा को व्यावहारिक और परिणामोन्मुख बनाया। पहले दिन का समापन रोबोटिक्स और ड्रोन टेक्नोलॉजी पर हैंड्स-ऑन वर्कशॉप्स और लाइव डेमोंस्ट्रेशन के साथ हुआ।

10 किलोग्राम पेलोड उठाने वाले ड्रोन सहित अत्याधुनिक प्रणालियों का प्रदर्शन

अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के तकनीकी विशेषज्ञों ने 10 किलोग्राम पेलोड उठाने वाले ड्रोन सहित कई अत्याधुनिक प्रणालियों का प्रदर्शन किया। इन प्रस्तुतियों ने प्रतिभागियों को रियल-वर्ल्ड एप्लिकेशंस और कंट्रोल सिस्टम्स की प्रत्यक्ष समझ दी। इस अवसर पर डायरेक्टोरेट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन, गुजरात सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

विजेता टीमों को कुल एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई

कॉन्क्लेव के दूसरे दिन फिजिकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भारत में इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स के व्यावहारिक उपयोग पर विशेषज्ञ व्याख्यान हुए। इसके बाद छात्रों के लिए रोबो रेस और मेज़ सॉल्वर जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिनमें 37 टीमों ने दो अलग-अलग कैटेगरी में भाग लिया। इन प्रतियोगिताओं ने छात्रों में समस्या-समाधान, नवाचार और एप्लाइड लर्निंग को प्रोत्साहित किया। विजेता टीमों को कुल 1,00,000 रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई।

समापन सत्र में डॉ. नरोत्तम साहू, प्रिंसिपल सेक्रेटरी, जीयूजेसीओएसटी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि ‘उभरती तकनीकें भारत के विकास लक्ष्यों के लिए बेहद अहम हैं और युवाओं को इन क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल करनी चाहिए।’

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