1. Home
  2. हिन्दी
  3. राष्ट्रीय
  4. पश्चिम एशिया संकट पर बोले मोहन भागवत- भारत ही युद्ध समाप्त कर सकता है, देश की जनता मानवता को मानती है
पश्चिम एशिया संकट पर बोले मोहन भागवत- भारत ही युद्ध समाप्त कर सकता है, देश की जनता मानवता को मानती है

पश्चिम एशिया संकट पर बोले मोहन भागवत- भारत ही युद्ध समाप्त कर सकता है, देश की जनता मानवता को मानती है

0
Social Share

नागपुर, 20 मार्च। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा है कि दुनिया मान रही है कि सिर्फ भारत ही पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को खत्म कर सकता है। उन्होंने विभिन्न देशों की ओर से इस युद्ध को रोकने के लिए भारत को दखल देने के लिए कहने का हवाला दिया है। ऐसे देशों में संयुक्त अरब अमीरात और फिनलैंड सबसे आगे रहे हैं।

‘दुनिया को सद्भाव चाहिए, संघर्ष नहीं’

डॉ. मोहन भागवत ने नागपुर में विश्व हिन्दू परिषद के विदर्भ प्रांत कार्यालय का शिलान्यास करने के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए वैश्विक संघर्ष की जड़ और सौहार्द के माध्यम से इसके समाधान के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि ‘युद्ध स्वार्थी हितों का परिणाम है, दुनिया को सद्भाव चाहिए, संघर्ष नहीं।’

मोहन भागवत ने कहा कि विश्व के कई देशों ने यह भावना जाहिर की है कि जिस तरह से भारत के अमेरिका और इजराइल से अच्छे संबंध हैं और ईरान के साथ भी सदियों पुरानी मित्रता है, इसमें ही यह क्षमता है, जो दोनों पक्षों के बीच दखल देकर जंग पर पानी डाल सकता है।

‘लड़खड़ाते विश्व में संतुलन बनाना हमारा कर्तव्य’

भारत और दुनिया की सोच में अंतर के बीच लकीर खींचते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘भारत के लोग मानवता के कानून का पालन करते हैं, लेकिन बाकी दुनिया जंगल के कानून का पालन करती है। धर्म का आधार देकर लड़खड़ाते हुए विश्व में संतुलन कायम करना हमारा कर्तव्य है।’

उन्होंने कहा, ‘चले हुए युद्ध में बार-बार देशों से आवाज उठ रही कि इसको समाप्त भारत ही कर सकता है। क्यों, क्योंकि भारत की इस प्रवृत्ति का ज्ञान उनको है। इसलिए ये काम होना है। पहले हमको तैयार होना पड़ेगा।’

धार्मिक असहिष्णुता, जबरन धर्मांतरण और श्रेष्ठता व हीनता का विचार अब भी मौजूद

मोहन भागवत के पश्चिम एशिया युद्ध को लेकर कहा कि करीब 2,000 वर्षों से दुनिया ने विभिन्न संघर्षों के समाधान का प्रयास किया है, लेकिन कई चुनौतियां बनी हुई हैं। उन्होंने यह भी ध्यान दिलाया कि धार्मिक असहिष्णुता, जबरन धर्मांतरण और श्रेष्ठता और हीनता का विचार अब भी मौजूद है।

भारत का परंपरागत दर्शन एकता व परस्पर संबद्धता को बढ़ावा देता है

उन्होंने बताया कि भारत का परंपरागत दर्शन एकता और परस्पर संबद्धता को बढ़ावा देता है। भारतीय सोच का आधार ये है कि हर कोई जुड़ा हुआ है और मॉडर्न साइंस भी धीरे-धीरे इसी समझ की ओर बढ़ रहा है।

धर्म सिर्फ धर्मग्रंथों तक सीमित नहीं रहना चाहिए

डॉ. भागवत ने कहा कि स्थायी शांति सत्ता संघर्ष से नहीं वरन एकता, अनुशासन और धर्म के पालन से आ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि धर्म सिर्फ धर्मग्रंथों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि दैनिक व्यवहार में भी प्रदर्शित होना चाहिए।

Join our WhatsApp Channel

And stay informed with the latest news and updates.

Join Now
revoi whats app qr code