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लखनऊ विश्वविद्यालय में RSS प्रमुख मोहन भागवत के विरोध की कोशिश, नारेबाजी के बाद कई छात्र हिरासत में

लखनऊ विश्वविद्यालय में RSS प्रमुख मोहन भागवत के विरोध की कोशिश, नारेबाजी के बाद कई छात्र हिरासत में

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लखनऊ, 18 फरवरी। लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर बुधवार को उस समय अखाड़े में तब्दील होता नजर आया, जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के कार्यक्रम का विरोध करने के लिए विभिन्न छात्र संगठन सड़क पर उतर आए।

परिसर के मालवीय सभागार में आयोजित ‘शोधार्थी संवाद’ कार्यक्रम में मोहन भागवत के पहुंचने से पहले ही एनएसयूआई (NSUI), समाजवादी छात्र सभा और भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोल दिया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने ‘गो बैक’ के नारों के साथ विश्वविद्यालय प्रशासन और संघ के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा और तीखी नोकझोक के बाद कई छात्रों को हिरासत में ले लिया गया।

गो बैकके नारों से गूंजा कैंपस, पुलिस से भिड़े छात्र

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, पूर्वाह्न 10.30 बजे से डॉ. भागवत का विश्वविद्यालय के शोधार्थियों के साथ सीधा संवाद होना था। जैसे ही इसकी जानकारी छात्र संगठनों को हुई, बड़ी संख्या में छात्र कैशियर ऑफिस के पास जमा हो गए। प्रदर्शनकारी छात्र हाथों में तख्तियां लेकर संघ प्रमुख के आगमन का विरोध कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान छात्रों की पुलिस के साथ जबरदस्त झड़प हुई। छात्रों ने बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए प्रदर्शनकारियों को मौके से उठाकर हिरासत में ले लिया और उन्हें वाहनों में भरकर थाने ले गई।

यूजीसी मुद्दे पर चुप्पी और पक्षपातके गंभीर आरोप

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे एनएसयूआई कार्यकर्ता शुभम खरवार ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन पूरी तरह से संघ की गोद में बैठ गया है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत यूजीसी (UGC) के विवादित फैसलों और उस पर आए सुप्रीम कोर्ट के स्टे के समर्थन में अपना रुख स्पष्ट करें। छात्रों ने सवाल उठाया कि जब सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के मुद्दे पर दखल दिया है तो देश के इतने बड़े संगठन के प्रमुख इस पर मौन क्यों हैं? उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में संघ की विचारधारा को जबरन थोपा जा रहा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सिर्फ भगवा संगठनों के लिए खुलते हैं हॉल के ताले

प्रदर्शनकारी छात्रों ने एलयू प्रशासन पर पक्षपात का बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के सभागार केवल आरएसएस और एबीवीपी (ABVP) के कार्यक्रमों के लिए ही उपलब्ध कराए जाते हैं। समाजवादी छात्र सभा के कार्यकर्ताओं ने कहा कि जब भी विपक्षी छात्र संगठन किसी शैक्षणिक या सामाजिक चर्चा के लिए हॉल की मांग करते हैं तो उन्हें नियमों का हवाला देकर टाल दिया जाता है, लेकिन भाजपा सरकार के दबाव में यूनिवर्सिटी प्रशासन संघ के आयोजनों के लिए रेड कार्पेट बिछा देता है। छात्रों ने इसे लोकतंत्र और शिक्षा के मंदिर का अपमान बताते हुए भविष्य में और भी बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। फिलहाल, परिसर में भारी पुलिस बल तैनात है और स्थिति नियंत्रण में है।

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