जेडीयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने छोड़ी पार्टी, नीतीश कुमार के साथ अपने 50 वर्षों के रिश्ते को किया याद
पटना, 17 मार्च। लंबे समय से पार्टी लाइन से अलग स्टैंड लेने के कारण हाशिए पर जा चुके जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने मंगलवार को पार्टी छोड़ने की औपचारिक घोषणा कर दी। उन्होंने पार्टी प्रमुख नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनावों में जीत हासिल करने के ठीक एक दिन यह कदम उठाया, जो पार्टी के भीतर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।
गौरतलब है कि त्यागी पिछले कुछ दिनों से अपनी ही पार्टी से नाराज चल रहे थे और खिलाफ में बयान दे रहे थे। इससे अनुमान लगाया जा रहा था कि पार्टी से उनका रिश्ता ज्यादा दिन नहीं चलने वाला था। अब उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर इस्तीफा शेयर कर इस बात को साफ कर दिया है कि वह जदयू की प्राथमिक सदस्यता छोड़ रहे हैं और आगे सदस्यता नहीं लेंगे।
केसी त्यागी ने एक विस्तृत पत्र में पार्टी की शुरुआत को याद करते हुए बताया कि जेडीयू का गठन 30 अक्टूबर, 2003 को जॉर्ज फर्नांडिस के नेतृत्व में समता पार्टी और जनता दल के विलय के बाद हुआ था।
त्यागी ने पत्र में पार्टी के साथ अपने लंबे जुड़ाव का जिक्र किया, जिसके तहत उन्होंने शरद यादव व नीतीश कुमार जैसे नेताओं के साथ मुख्य महासचिव, मुख्य प्रवक्ता और राजनीतिक सलाहकार जैसे अहम संगठनात्मक पदों पर रहकर करीब से काम किया था।
अपने फैसले की घोषणा करते हुए त्यागी ने कहा कि हाल ही में चले सदस्यता अभियान के खत्म होने के बाद उन्होंने अपनी पार्टी की सदस्यता का नवीनीकरण नहीं कराया है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसानों, दलितों और समाज के वंचित वर्गों के कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता में कोई बदलाव नहीं आया है।
22 मार्च को समर्थकों और साथियों संग करेंगे बैठक
केसी त्यागी ने बताया कि वह 22 मार्च को अपने समर्थकों और साथियों के साथ बैठक करेंगे। इसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। माना जा रहा है कि वह जल्द ही कोई नया रास्ता चुन सकते हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार त्यागी अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हो सकते हैं क्योंकि वहां उनके काफी समर्थक हैं।
बीते दिनों आईपीएल में बांग्लादेशी खिलाड़ियों को लेकर बयान और फिलिस्तीन के मुद्दे पर उन्होंने पार्टी से अलग स्टैंड रखा था। इस पर पार्टी ने कहा था कि केसी त्यागी पार्टी में किसी पद पर नहीं हैं तो उनके बयान को जदयू से जोड़कर नहीं देखा जाए। काफी समय से पार्टी भी उन्हें ज्यादा महत्व नहीं दे रही थी।
