मुंबई, 24 अगस्त। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक को पत्र लिखकर रैपिडो, ओला और उबर जैसी ऐप आधारित सेवाओं के कारण राज्य के ऑटो रिक्शा चालकों की आजीविका पर पड़ रहे असर का मुद्दा उठाया है। उन्होंने परिवहन मंत्री से अपील की है कि इन सेवाओं के चलते हजारों रिक्शा चला रहे मराठी युवाओं को रोजगार से वंचित करना उचित नहीं है।
रैपिडो को लेकर लगाए गंभीर आरोप
संजय राउत ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि राज्य के कुछ मंत्रियों के रैपिडो कंपनी के साथ वित्तीय और व्यावसायिक संबंध हैं। उन्होंने दावा किया कि रैपिडो ने दही हांडी, गणेशोत्सव और कुछ मंत्रियों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों को प्रायोजित किया है और इसके लिए करोड़ों रुपये दिए हैं। राउत ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मंत्रियों को चुनाव के लिए भी आर्थिक मदद दी गई। उन्होंने कहा कि ऐसे में यह आशंका पैदा होती है कि हजारों रिक्शा चालकों को इन सेवाओं के नाम पर प्रभावित कर एहसान चुकाने की कोशिश की जा रही है।
‘उपमुख्यमंत्री का मूल पेशा रिक्शा चालक रहा है’
संजय राउत ने पत्र में कहा कि जब महाराष्ट्र के मौजूदा उपमुख्यमंत्री का मूल पेशा ही रिक्शा चालक रहा है, तो राज्य के रिक्शा चालकों की आजीविका छीनना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर रिक्शा चालक संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल के साथ परिवहन मंत्री से मुलाकात करना चाहते हैं। राउत ने मंत्री से मुलाकात के लिए उचित समय और स्थान की जानकारी देने का अनुरोध किया है।
सहकारी क्षेत्र को लेकर भी केंद्र पर साधा था निशाना
संजय राउत ने हाल ही में केंद्र सरकार पर महाराष्ट्र के सहकारी क्षेत्र के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया था। 20 अगस्त को उन्होंने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 के पारित होने और मुंबई में राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त विकास निगम (एनयूसीएफडीसी) के कार्यालय के उद्घाटन को लेकर चिंता जताई थी। राउत ने अपने पत्र की प्रति महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राष्ट्रीय सहकारी समिति के अध्यक्ष शरद पवार को भी भेजी थी।
शहरी सहकारी बैंकों की संपत्तियों को लेकर जताई आपत्ति
राउत ने शहरी सहकारी बैंकिंग परिसंपत्तियों से जुड़े मंत्रालय के हालिया फैसलों पर भी आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि पत्र जानबूझकर मराठी में लिखा गया है, ताकि जनता समझ सके कि उनके अनुसार महाराष्ट्र के शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के साथ किस प्रकार अन्याय किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया था कि विधेयक को जल्दबाजी में पारित किया गया और एनयूसीएफडीसी के माध्यम से महाराष्ट्र और गोवा के शीर्ष शहरी सहकारी बैंक की संपत्ति उसके सदस्यों की सहमति के बिना जब्त कर ली गई। राउत ने इसे महाराष्ट्र के सहकारी आंदोलन पर सीधा हमला बताया था।


