नई दिल्ली, 24 अगस्त। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया। उन्होंने करुणा, संतोष, पुरुषार्थ और दृढ़ निश्चय के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इन भावों से समाज में सहयोग और सद्भाव की भावना मजबूत होती है। प्रधानमंत्री ने लिखा, “करुणा से आत्म-सम्मान और संतोष से सच्ची खुशी मिलती है। इसी भाव से समाज में सहयोग और सद्भाव की डोर और सशक्त होती है।”
पीएम मोदी ने शेयर किया संस्कृत श्लोक
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में यह संस्कृत श्लोक साझा किया:
“कारुण्येनात्मनो मानं तृष्णां च परितोषतः।
उत्थानेन जयेत्तन्द्रीं वितर्कं निश्चयाज्जयेत्॥”
इसका हिंदी अर्थ है कि दूसरों के प्रति करुणा का भाव रखने से आत्म-सम्मान प्राप्त होता है और संतोष के जरिए तृष्णा पर विजय पाई जा सकती है। पुरुषार्थ से आलस्य तथा निश्चय के माध्यम से आधारहीन आशंकाओं और वितर्क पर विजय प्राप्त करने का संदेश भी इस श्लोक में दिया गया है।
21 अगस्त को भी साझा किया था सुभाषित
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 अगस्त को भी सोशल मीडिया पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया था। उन्होंने नदियों के अविरल प्रवाह को मानवता की सेवा और परोपकार की प्रेरणा से जोड़ते हुए लिखा था कि निःस्वार्थ सेवा, समर्पण और परोपकार की भावना राष्ट्र को नई दिशा देती है। उस पोस्ट में प्रधानमंत्री ने यह संस्कृत श्लोक साझा किया था:
“जीवनं स्वं परार्थाय नित्यं यच्छत मानवाः।
इति सन्देशमाख्यातुं समुद्रं यान्ति निम्नगाः॥”
इसका भावार्थ है कि मनुष्य को अपना जीवन दूसरों की सेवा और कल्याण के लिए समर्पित करना चाहिए। जिस प्रकार नदियां बिना किसी स्वार्थ के बहते हुए अपने जल से असंख्य प्राणियों का जीवन पोषित करती हैं और अंत में समुद्र में विलीन हो जाती हैं, उसी प्रकार मनुष्य को भी अपने जीवन और सामर्थ्य का उपयोग दूसरों के हित में करना चाहिए।
20 अगस्त को संकट में उत्साह बनाए रखने का दिया था संदेश
प्रधानमंत्री ने 20 अगस्त को भी सोशल मीडिया पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया था। इसमें संकट और कठिन परिस्थितियों में भी उत्साह बनाए रखने का संदेश दिया गया था। उन्होंने यह श्लोक साझा किया था:
“आपत्काले च कष्टेऽपि नोत्साहस्त्यज्यते बुधैः।
इति प्रबोधितस्तेन कथञ्चिद् दृढबुद्धिना।”
इसका हिंदी भावार्थ है कि बुद्धिमान और दृढ़ बुद्धि वाले व्यक्ति संकट तथा कठिन परिस्थितियों में भी अपना उत्साह नहीं छोड़ते। यह सुभाषित विपरीत परिस्थितियों में धैर्य, आत्मविश्वास और सकारात्मकता बनाए रखने की प्रेरणा देता है।


