BRICS Summit: दिल्ली पहुंचे पुतिन, आज मोदी से होगी अहम मुलाकात; Su-57 से लेकर ब्रह्मोस-NG तक इन मुद्दों पर चर्चा

नई दिल्ली, 11 सितंबर। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए शुक्रवार तड़के विशेष विमान से नई दिल्ली पहुंचे। पालम एयरफोर्स स्टेशन पर विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह (केवी सिंह) ने उनका औपचारिक स्वागत किया। इस दौरान रूसी राष्ट्रपति को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस के बाहर आयोजित किसी ब्रिक्स सम्मेलन में पुतिन की यह पहली व्यक्तिगत मौजूदगी है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के औपचारिक आगाज से पहले शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है।

Su-57 और ब्रह्मोस-NG पर नजर

मोदी-पुतिन बैठक में रक्षा सहयोग सबसे अहम मुद्दों में शामिल हो सकता है। बातचीत में रूस के 5वीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट Su-57 के भारत में संयुक्त उत्पादन और तकनीक हस्तांतरण (ToT) पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा भारतीय वायुसेना के Su-30MKI लड़ाकू विमानों को ‘सुपर सुखोई’ मानक पर अपग्रेड करने, रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की शेष खेप की जल्द आपूर्ति और हल्की व तेज BrahMos-NG मिसाइल के संयुक्त विकास पर भी चर्चा हो सकती है।

मोदी-पुतिन बैठक के 4 बड़े एजेंडे

1. रक्षा सहयोग और सैन्य अपग्रेड
भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग बैठक का प्रमुख केंद्र रहने की उम्मीद है। S-400 की शेष आपूर्ति, Su-30MKI के ‘सुपर सुखोई’ अपग्रेड और तेजस जैसे हल्के लड़ाकू विमानों के लिए उपयुक्त ब्रह्मोस-NG के विकास पर बातचीत हो सकती है।

2. परमाणु ऊर्जा में सहयोग
दोनों देश कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की अगली परियोजनाओं के साथ भारत में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) स्थापित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा कर सकते हैं। इस क्षेत्र में रूस की परमाणु ऊर्जा कंपनी रोसाटॉम की भूमिका महत्वपूर्ण है।

3. रुपये-रूबल भुगतान व्यवस्था
भारत और रूस डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने के विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। दोनों देशों के बीच रुपये-रूबल तंत्र को अधिक प्रभावी बनाने और जमा धन के निवेश से जुड़े विकल्प भी एजेंडे में हो सकते हैं।

4. कनेक्टिविटी कॉरिडोर पर जोर
International North-South Transport Corridor (INSTC) और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री गलियारे को गति देने पर भी चर्चा संभव है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य भारत और रूस के बीच माल परिवहन को अधिक तेज और प्रभावी बनाना है।

पुतिन की सुरक्षा के लिए कड़ा इंतजाम

रूसी राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर दिल्ली में व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पुतिन के काफिले और उनकी अभेद्य बख्तरबंद Aurus Senat लिमोजिन को जेवर एयरपोर्ट के रास्ते पहले ही भारत लाया गया था। इसके लिए रूस के तीन IL-76 मालवाहक विमान इस्तेमाल किए गए थे। नई दिल्ली स्थित ITC Maurya में पुतिन के ठहरने के दौरान आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी रूस की Federal Protective Service (FSO) के पास रहेगी, जबकि बाहरी सुरक्षा भारतीय सुरक्षा एजेंसियां संभालेंगी। मोदी और पुतिन की प्रस्तावित बैठक को भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से अहम माना जा रहा है। रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और कनेक्टिविटी से जुड़े फैसलों पर दोनों नेताओं की बातचीत पर सभी की नजर रहेगी।

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