नई दिल्ली, 27 अक्टूबर। कांग्रेस ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले चढ़ावे और कीमती दान में कथित अनियमितताओं को लेकर मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुप्पी तोड़नी चाहिए, क्योंकि पूरा देश जवाब मांग रहा है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह मांग फिर उठाई कि पूरे मामले की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री चुप्पी तोड़िए। देश जानना चाहता है कि चंदा चोर कौन हैं? भागीदार कौन-कौन हैं?
उच्चतम न्यायालय की देखरेख में निष्पक्ष जांच क्यों नहीं?” उन्होंने दावा किया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के कुछ महीने बाद नवंबर, 2020 में एक निजी ऑडिट कंपनी ने उसके ”इंटरनल ऑडिट और रिस्क मैनेजमेंट” को लेकर कई गंभीर खामियां बताई थीं। रमेश के मुताबिक, कंपनी ने प्रबंधन को ”बहुत ही गैरपेशेवर” बताते हुए कहा था कि जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से तय नहीं हैं, दान का व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं है और लेन-देन तथा डेटा एंट्री की दूसरी या तीसरी जांच की व्यवस्था भी नहीं है।
उन्होंने दावा किया कि ऑडिट कंपनी ने बैंक मिलान एवं लेखांकन के लिए योग्य कर्मचारियों की कमी और आईटी डेटा की सुरक्षा तथा सत्यापन की उचित व्यवस्था नहीं होने की ओर भी ध्यान दिलाया था। कांग्रेस नेता ने कहा, ”जब खतरा 2020 में ही लिखकर बता दिया गया था, तो उस पर काम क्यों नहीं हुआ? शिकायत करने वाले को ही क्यों हटाया गया? श्रद्धालुओं के कीमती दान की रसीद तक क्यों नहीं काटी गई?” उन्होंने दावा किया कि 2026 में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने भी पाया कि नकदी की गिनती वाले कमरे से 105 बार नकदी निकाली गई और कर्मचारी कथित तौर पर कैमरों के सामने खड़े होकर उन्हें ढक देते थे।
रमेश ने मंदिर निर्माण से जुड़े इंजीनियर दीनानाथ वर्मा के आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने ट्रस्ट के पदाधिकारी चंपत राय को ठेकों में कथित तौर पर ”40 प्रतिशत कमीशन”, फर्जी मजदूर दिखाने और सामान के बढ़े हुए बिल बनाने की शिकायत की थी। कांग्रेस नेता के मुताबिक, वर्मा का आरोप है कि कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ही हटा दिया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि जांच में कई ऐसी बेशकीमती वस्तुएं मिलीं, जिनके लिए दानदाताओं को रसीद जारी नहीं की गई थी।
रमेश ने कहा, ”देश की जनता को सरकारी एसआईटी की जांच पर भरोसा नहीं है।” उन्होंने कहा कि केवल कुछ कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई से मामला समाप्त नहीं हो सकता और सभी जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच होनी चाहिए। कांग्रेस महासचिव का कहना है कि ऑडिट की चेतावनियों, ठेकों में कथित कमीशनखोरी, कथित हेराफेरी और बेशकीमती दान का पूरा हिसाब सामने आना चाहिए। रमेश ने कहा, ”राम के नाम पर आए चढ़ावे का हिसाब देश मांग रहा है। श्रद्धालुओं की आस्था किसी को भी जवाबदेही से बचने का अधिकार नहीं देती।”


