नई दिल्ली, 29 सितंबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए परिश्रम, साहस और पुरुषार्थ का संदेश दिया। उन्होंने संस्कृत का प्रसिद्ध श्लोक साझा कर बताया कि जिन लोगों में उद्यम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम जैसे गुण होते हैं, उनके लिए परिस्थितियां भी अनुकूल होती हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा-
“उद्यमः साहसं धैर्यं बुद्धिः शक्तिः पराक्रमः।
षडेते यत्र वर्तन्ते तत्र दैवं सहायकृत्॥”
इस श्लोक का भावार्थ है कि जिस व्यक्ति में परिश्रम करने की इच्छाशक्ति, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम जैसे छह गुण मौजूद होते हैं, वहां दैव भी सहायता करता है।
मेहनत और पुरुषार्थ पर जोर
इस सुभाषित के जरिए यह संदेश दिया गया है कि केवल भाग्य के भरोसे बैठने के बजाय व्यक्ति को अपने प्रयासों और कर्म पर भरोसा करना चाहिए। किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए निरंतर मेहनत, आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति जरूरी है। श्लोक में उद्यम को परिश्रम और प्रयास से जोड़ा गया है, जबकि साहस नई चुनौतियों और जोखिमों का सामना करने की प्रेरणा देता है। धैर्य कठिन परिस्थितियों में संयम बनाए रखने और बुद्धि समस्याओं के समाधान के लिए सही निर्णय लेने की क्षमता का प्रतीक है।
छह गुणों को बताया सफलता का आधार
सुभाषित में शक्ति और पराक्रम को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। किसी कार्य को पूरा करने के लिए शारीरिक और मानसिक क्षमता के साथ दृढ़ संकल्प और पूरी ऊर्जा से प्रयास करना जरूरी है। इस श्लोक का मूल संदेश यही है कि जब व्यक्ति खुद कर्म और पुरुषार्थ करता है, तो परिस्थितियां भी उसके पक्ष में आने लगती हैं। सफलता के लिए भाग्य की प्रतीक्षा करने के बजाय अपने भीतर इन छह गुणों को विकसित करना और लगातार प्रयास करते रहना जरूरी है।


