नई दिल्ली, 5 सितम्बर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार की शाम विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए 2013 के संकटों की तुलना आज के सशक्त भारत से की। वह दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह को संबोधित कर रहे थे।
मैंने आलोचकों को दी थीं ‘होम्योपैथिक गोलियां’
पीएम मोदी ने लाल किले से अपने पिछले स्वतंत्रता दिवस संबोधन का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल कर आलोचकों को ‘होम्योपैथिक गोलियां’ दी थीं। उन्होंने कहा, “होम्योपैथिक इलाज में थोड़ी देर के लिए बीमारी बढ़ती ही है। जैसे ही मैंने यह गोली दी, सारे दिमागी नक्सल बाहर निकलने लगे। लेकिन जनता उनका असली रंग देख रही है।”
Delighted to attend the centenary celebrations of Shri Ram College of Commerce (SRCC) at Delhi University.
Brought back several memories of my 2013 address at the same college.
For a hundred years, SRCC has nurtured bright minds and contributed immensely to nation-building.… pic.twitter.com/TIThccN7DM
— Narendra Modi (@narendramodi) September 5, 2026
ऐसे फूफाओं को भारत ने मुंहतोड़ जवाब दिया
विरोधियों पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने देश में दो तरह के लोगों का जिक्र किया। एक वो जो समाज की शक्ति को राष्ट्र की शक्ति में सकारात्मक रूप से बदलते हैं। दूसरे वो जो हर मुद्दे पर ‘नाराज फूफा’ बन जाते हैं। उन्होंने कहा, “उनका एक ही डायलॉग है : इसकी क्या जरूरत है? जब हम दुनिया की सबसे बड़ी मूर्ति बना रहे थे, तो उन्होंने कहा, इसकी क्या जरूरत है? बुलेट ट्रेन, यूपीआई, चिप, नई संसद को लेकर भी उन्होंने यही कहा। जब हमने देश के लिए जान देने वाले सेना के वीरों के लिए स्मारक बनाया, तो फिर फूफा जी मैदान में आ गए। लेकिन ऐसे फूफाओं को भारत ने मुंहतोड़ जवाब दिया।”
‘नाराज फूफा’ देश की प्रगति को नहीं रोक सकते! pic.twitter.com/ghqDrbPm0t
— Narendra Modi (@narendramodi) September 5, 2026
देश 2014 से पहले की तुलना में आर्थिक और सामाजिक रूप से कहीं अधिक सुरक्षित
अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने छात्रों से कहा कि देश अब 2014 से पहले की तुलना में आर्थिक और सामाजिक रूप से कहीं अधिक सुरक्षित है। उन्होंने कहा, ‘मैं आपको पुराने दिनों में ले जाना चाहता हूं। 2013 की केदारनाथ आपदा याद कीजिए, जिसने पूरी सरकार को हिला दिया था। 2008 में बैंकिंग संकट आया था, जिसने भारत की बैंकिंग व्यवस्था को तबाह कर दिया था। 2008 में ही मुंबई में आतंकवादी हमला हुआ था, लेकिन तत्कालीन सरकार ने कोई काररवाई नहीं की। वहीं हमारी सरकार ने पिछले छह वर्षों में कोविड, रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका-ईरान संघर्ष सहित बड़े संकटों का सामना किया है।’
लोगों ने सोचा था कि वे मोदी को कुचल देंगे
पीएम मोदी ने कहा, ‘लोगों ने सोचा था कि वे मोदी को कुचल देंगे। लेकिन मेरे देश के लोगों में इतनी ताकत है कि भारत का बुरा चाहने वालों की इच्छाएं दब रही हैं।’ प्रधानमंत्री ने वैश्विक व्यापार के विस्तार में हुई प्रगति पर भी प्रकाश डाला। पिछले एक दशक में लगभग 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘जब नए बाजार खुलते हैं तो भारत के युवाओं के लिए नए अवसर पैदा होते हैं।’
‘मुझे देश के युवाओं पर भरोसा है, 140 करोड़ भारतीय मिलकर विकसित भारत को संभव बनाएंगे’
उन्होंने कहा, ‘आज देश 2013 की तुलना में आर्थिक और सामाजिक रूप से कहीं अधिक सुरक्षित है। लेकिन कुछ लोगों को घबराहट होने लगी है।’ युवा पीढ़ी में विश्वास व्यक्त करते हुए पीएम मोदी ने कहा, ‘मुझे देश पर भरोसा है। मुझे देश के युवाओं पर भरोसा है। मेरा मानना है कि हम 140 करोड़ भारतीय मिलकर विकसित भारत को संभव बनाएंगे। भविष्य में भारत अनुसंधान और नवाचार का केंद्र बनेगा। भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन होगा और आप वह दिन भी देखेंगे। आप देखेंगे कि एक दिन भारत ओलंपिक की मेजबानी करेगा, जिसे दुनिया देखेगी।’
इस कैंपस के बाहर आपको एक अलग दुनिया मिलेगी
उन्होंने छात्रों से कैंपस से बाहर की जिंदगी के बारे में भी सीधे बात की। उन्होंने कहा, ‘दोस्तों, अभी आपकी जिंदगी एसआरसीसी मोड में चल रही है। इसमें कोल्ड कॉफी पर चर्चाएं, आखिरी मिनट में परीक्षा की तैयारी और बिजनेस कॉन्क्लेव में कड़ी मेहनत शामिल है। लेकिन इस कैंपस के बाहर आपको एक अलग दुनिया मिलेगी।’
प्रधानमंत्री ने कहा, “2013 से पहले छात्र स्टार्टअप, यूनिकॉर्न या अंतरिक्ष उद्यम बनाने का सपना भी नहीं देख सकते थे। आज हमारे युवा साथी कहते हैं, ‘मैं स्टार्टअप बनाऊंगा। मैं यूनिकॉर्न बनाऊंगा। मैं अंतरिक्ष से जुड़ा स्टार्टअप शुरू करूंगा।’ 2013 से पहले आपके सीनियर्स ने इस तरह के सपने नहीं देखे थे। लेकिन समय बदल गया है।”
युवाओं से एक संकल्प लेने का आग्रह किया
उन्होंने युवाओं से एक संकल्प लेने का आग्रह किया : ‘दुनिया की ग्लोबल फर्में हमारी क्यों नहीं हो सकतीं? हम गर्व से कहते हैं कि भारतीय दुनिया की शीर्ष कम्पनियों का नेतृत्व कर रहे हैं, तो वे कंपनियां भारतीय क्यों नहीं हैं?’
सूरज हमारा हो, समंदर भी हमारा हो।
नाव हमारी हो, नाविक भी हमारा हो।
लहरों पर विजय लिखें, वो हौसला हमारा हो। pic.twitter.com/oNNFck16hR
— Narendra Modi (@narendramodi) September 5, 2026
‘नाव भी हमारी, नाविक भी हमारा’
अपने संबोधन के अंत में पीएम मोदी ने कहा, ‘नाव भी हमारी, नाविक भी हमारा। लहरों पर जीत लिखने का हौसला भी हमारा। उड़ान भी हमारी, हवाओं का सामना करने का जुनून भी हमारा। सपना भी हमारा, संकल्प भी हमारा। आत्मनिर्भर भारत का संकल्प भी हमारा। विकसित भारत के मार्ग पर हमारा हर कदम भी हमारा हो।’


