PM Modi Subhashit: पीएम मोदी ने साझा किया संस्कृत श्लोक, नदियों से लिया निःस्वार्थ सेवा और परोपकार का संदेश

नई दिल्ली, 21 अगस्त। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया। इस श्लोक के जरिए उन्होंने नदियों के निरंतर प्रवाह का उदाहरण देते हुए मानव जीवन को निःस्वार्थ सेवा, समर्पण और परोपकार के लिए समर्पित करने का संदेश दिया।

पीएम मोदी ने साझा किया संस्कृत श्लोक

प्रधानमंत्री मोदी ने पोस्ट में लिखा, “नदियों का अविरल प्रवाह सिखाता है कि हम किस प्रकार अपने सामर्थ्य का उपयोग मानवता की भलाई के लिए कर सकते हैं। निःस्वार्थ सेवा, समर्पण और परोपकार की यही भावना राष्ट्र को नई दिशा देती है।” इसके साथ उन्होंने संस्कृत का यह श्लोक साझा किया:

“जीवनं स्वं परार्थाय नित्यं यच्छत मानवाः।
इति सन्देशमाख्यातुं समुद्रं यान्ति निम्नगाः॥”

क्या है श्लोक का अर्थ?

इस सुभाषित का भावार्थ है कि मनुष्य को अपना जीवन दूसरों की सेवा और कल्याण के लिए समर्पित करना चाहिए। जिस तरह नदियां बिना किसी स्वार्थ के निरंतर बहती हैं और अपने जल से रास्ते में आने वाले असंख्य जीवों और लोगों का जीवन पोषित करती हैं, उसी तरह इंसान को भी अपनी क्षमता और संसाधनों का इस्तेमाल दूसरों के हित में करना चाहिए।श्लोक के माध्यम से निःस्वार्थ सेवा, परोपकार और लोककल्याण को मानव जीवन की सार्थकता से जोड़ा गया है।

संकट में उत्साह न खोने का भी दिया था संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने इससे एक दिन पहले भी सोशल मीडिया पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया था। इसमें मुश्किल परिस्थितियों में भी धैर्य और उत्साह बनाए रखने की सीख दी गई थी।

उन्होंने श्लोक साझा किया था:

“आपत्काले च कष्टेऽपि नोत्साहस्त्यज्यते बुधैः।
इति प्रबोधितस्तेन कथञ्चिद् दृढबुद्धिना।”

इसका भावार्थ है कि बुद्धिमान और दृढ़ संकल्प वाले लोग संकट या कठिन परिस्थितियों में भी अपना उत्साह नहीं छोड़ते। मुश्किल समय में धैर्य बनाए रखना और मजबूत मनोबल के साथ आगे बढ़ना जरूरी है।

परोपकार को बताया था जीवन की सार्थकता

बुधवार को भी प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक संस्कृत श्लोक साझा करते हुए परोपकार और कल्याणकारी कार्यों का संदेश दिया था।

उन्होंने लिखा था:

“एतावज्जन्मसाफल्यं देहिनामिह देहिषु।
प्राणैरर्थैर्धिया वाचा श्रेय एवाचरेत्सदा॥”

इसका अर्थ है कि मानव जीवन की वास्तविक सार्थकता दूसरों के कल्याण में है। व्यक्ति को अपनी शारीरिक क्षमता, धन-संपत्ति, बुद्धि और वाणी का उपयोग सदैव परोपकार और लोकहित के कार्यों के लिए करना चाहिए। इस तरह प्रधानमंत्री मोदी के हालिया सुभाषित संदेशों में परोपकार, निःस्वार्थ सेवा, धैर्य और लोककल्याण जैसे विचार प्रमुखता से सामने आए हैं।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular