लखनऊ/अयोध्या, 25 जून। अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावा में कथित घोटाले को लेकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत और विशेष जांच टीम (SIT) की सिफारिश के बाद गुरुवार को श्रीराम जन्मभूमि कोतवाली में एफआईआर दर्ज कर ली गई।
सूत्रों के अनुसार एफआईआर में आठ लोगों को नामजद किया गया है। इनमें रमाशंकर यादव (टिन्नू यादव), अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष, करुणेश और लवकुश मिश्रा शामिल हैं।
दो मुख्य आरोपित – लवकुश मिश्रा व अनुकल्प मिश्रा गिरफ्तार
इनमें से दो मुख्य आरोपित – लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। ये दोनों नोटों की गिनती काम काम करते थे। वहीं, अविनाश त्रिपाठी, करुणेश पांडे, सुभाष और मनीष यादव को हिरासत में लिया गया है। सुभाष काउंटिंग इंचार्ज की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
यूपी सरकार के निर्देश पर बीएनसी के तहत 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5) की धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई है। इनमें चोरी, चोरी में मदद करना, गबन, धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और सरकारी कर्मचारी या संस्थाकर्मी के द्वारा आपराधिक षडयंत्र के तहत विश्वासघात की धाराएं शामिल हैं।
श्री कृष्ण मोहन की शिकायत पर दर्ज किया गया मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार श्री कृष्ण मोहन की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ है। जिन लोगों के पास से रकम मिली है, उन सभी को एफआईआर में नामजद किया गया है। कहा जा रहा है कि इस मामले में बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां होंगी। ऐसे में आगे की जांच और संभावित काररवाई पर अब सबकी नजरें टिकी हैं। शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में बताया है कि ये आठ लोग सिस्टमैटिक तरीके से मंदिर के चढ़ावे की चोरी कर रहे थे। एसआईटी की जांच में भी ये बात सामने आई है।
अखिलेश यादव का तंज – फुनगी को फांसी, शाखाओं को मिलेगी फांसी
इस बीच राज्य के पूर्व सीएम व समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद तंज कसते हुए कहा – ‘बीजेपी राज में नाइंसाफी की दिखेगी ये झांकी। फुनगी को फांसी, शाखाओं को मिलेगी फांसी।
अखिलेश ने सोशल मीडिया पोस्ट कर कहा कि जनता कह रही है कि पहले एसआईटी के बहाने सारे सबूत साफ कर दिए गए होंगे और ये निश्चित कर लिया गया होगा कि किन बड़ी मछलियों को बचाना है और किसको फंसाना है, उसके बाद एफआईआर हो रही है। लगता है कि एसआईटी को पहले रिपोर्ट बनाकर दे दी गई होगी और उसके हिसाब से जांच की गई होगी। मतलब निष्कर्ष पहले निकाल लिया गया होगा।
उल्लेखनीय है कि यह मामला पहली बार गत सात जून को राजनीतिक बहस का विषय बना था, जब अखिलेश यादव ने दावा किया था कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए करोड़ों रुपये के दान में गड़बड़ी हुई है। उन्होंने अदालत से इस मामले का संज्ञान लेने की भी मांग की थी।


