नई दिल्ली, 11 सितम्बर। संसद का मानसून सत्र खत्म हुए करीब एक माह होने जा रहा है, लेकिन सरकार ने अब तक इसका औपचारिक सत्रावसान नहीं किया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इसे लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि संसद को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने और सत्रावसान के बीच का अंतर अब 29 दिन हो गया है। यह 2015 के 28 दिनों के अंतर से भी ज्यादा है।
रमेश ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि आम तौर पर संसद की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के तीन-चार दिन के भीतर सत्रावसान कर दिया जाता है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ है। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई को शुरू हुआ था और 13 अगस्त को दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी।
तो आज मोदी सरकार ने 2015 में बनाए अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ते हुए एक नया रिकॉर्ड कायम कर दिया है।
संसद को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने और उसके सत्रावसान के बीच का अंतर 29 दिन हो गया है। 2015 के मानसून सत्र में यह अंतर 28 दिनों का था। 2026 के मानसून सत्र में यह अंतर हर दिन…
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) September 11, 2026
सत्रावसान नहीं होने को परिसीमन से जोड़ा
कांग्रेस नेता ने संसद का सत्रावसान नहीं किए जाने को परिसीमन के मुद्दे से जोड़ते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि परिसीमन के लिए सरकार दो तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश में हैं। परिसीमन का मतलब लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाओं और उनके प्रतिनिधित्व का नए सिरे से निर्धारण करना है। यह इसलिए महत्वपूर्ण है कि इससे भविष्य में अलग-अलग राज्यों की लोकसभा सीटों की संख्या और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है।
जयराम रमेश ने कहा कि विपक्षी दल मार्च 2026 के मध्य से ही सरकार से परिसीमन के प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग कर रहे हैं। उनका सवाल है कि सरकार इस मुद्दे पर सभी दलों के साथ खुलकर चर्चा क्यों नहीं कर रही है।


