Monsoon Health Tips: बारिश में मौसमी संक्रमण से बचना है तो अपनाएं ये आसान उपाय

लखनऊ, 1 सितंबर। बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन इसके साथ कई तरह के मौसमी संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। गंदा पानी, नमी, मच्छरों की बढ़ती संख्या और साफ-सफाई में लापरवाही स्वास्थ्य के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। हालांकि, रोजमर्रा की कुछ छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर संक्रमण के जोखिम को कम किया जा सकता है।

आयुष मंत्रालय ने मानसून के दौरान स्वस्थ रहने और मौसमी संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी स्वच्छता संबंधी सुझाव साझा किए हैं। मंत्रालय के मुताबिक, स्वस्थ मानसून की शुरुआत साफ-सफाई की आसान आदतों से होती है। नियमित हाइजीन और आसपास सफाई रखने से संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

बारिश में मौसमी संक्रमण से बचने के लिए अपनाएं ये आदतें

आयुष मंत्रालय की ओर से साझा की गई हाइजीन चेकलिस्ट में रोजमर्रा की कुछ जरूरी सावधानियों पर जोर दिया गया है।

हाथ साफ रखें: बारिश के मौसम में साबुन और पानी से नियमित रूप से हाथ धोना जरूरी है। खासकर खाना खाने से पहले और बाहर से घर आने के बाद हाथों की अच्छी तरह सफाई करें।

गीले कपड़े तुरंत बदलें: बारिश में भीगने या कपड़े गीले होने पर उन्हें ज्यादा देर तक न पहनें। गीले कपड़ों को तुरंत बदलकर शरीर को सूखा रखें।

पैरों की सफाई का रखें ध्यान: बारिश के दौरान पैरों में नमी और गंदगी जमा हो सकती है। इसलिए पैरों को नियमित रूप से साफ करने के साथ अच्छी तरह सुखाना भी जरूरी है।

घर के आसपास पानी जमा न होने दें: रुका हुआ पानी मच्छरों के पनपने का कारण बन सकता है। इसलिए घर, छत, बालकनी और आसपास की जगहों पर पानी जमा न होने दें।

कचरे का सही तरीके से निपटारा करें: घर के आसपास कचरा जमा न होने दें और उसे निर्धारित स्थान पर ही फेंकें। इससे मच्छरों और अन्य कीटों की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।

खांसी होने पर भी रखें सावधानी

आयुष मंत्रालय ने हाल में खांसी के सामान्य लक्षणों को पहचानने और आयुष आधारित कुछ सेल्फ-केयर उपायों के बारे में भी जानकारी साझा की थी। मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लोगों को बेहतर श्वसन स्वास्थ्य के लिए खांसी के लक्षणों को पहचानने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह दी।

मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी में सूखी खांसी के लिए मुलेठी या लौंग का छोटा टुकड़ा मुंह में रखने, वासा (अधातोडा वासिका) के पत्तों का काढ़ा या पाउडर लेने जैसे पारंपरिक उपायों का उल्लेख किया गया था।

इसके अलावा हल्दी वाला गर्म दूध, शहद के साथ गुनगुना अदरक या अदरक-तुलसी का काढ़ा, गर्म नमक के पानी से गरारे और भाप लेने जैसे उपाय भी बताए गए थे। लौंग, अदरक और इलायची को पाउडर या काढ़े के रूप में लेने का भी उल्लेख किया गया।

कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी?

घरेलू या पारंपरिक उपाय हल्के लक्षणों में राहत देने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं, लेकिन लगातार या गंभीर खांसी, सांस लेने में परेशानी, तेज बुखार, सीने में दर्द या अन्य चिंताजनक लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह खबर आयुष मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी पर आधारित है। किसी बीमारी या लगातार बने रहने वाले लक्षण के इलाज के लिए चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता दें।

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