नई दिल्ली, 9 जनवरी। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने बहुचर्चित लैंड फॉर जॉब मामले में शुक्रवार को अहम फैसला सुनाया। अदालत ने इस मामले में कुल 98 आरोपियों में से 52 आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया है, जबकि शेष आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में 5 आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है, ऐसे में अब 41 लोगों के खिलाफ मुकदमा चलेगा।
इस मामले में अगली सुनवाई अब 29 जनवरी को होगी। अदालत ने पूर्व रेल मंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव समेत उनके परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ आरोप तय किए हैं। कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेज प्रताप यादव, तेजस्वी यादव, मीसा भारती और हेमा यादव के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया।
अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि आरोप है कि लालू प्रसाद यादव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपनी पत्नी और बच्चों के नाम अचल संपत्तियां जुटाईं। अदालत के अनुसार, इस पूरे मामले में अन्य आरोपियों ने भी आपराधिक षड्यंत्र में सक्रिय रूप से सहयोग किया।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि रेलवे में नौकरियों के बदले जमीन लेने का एक तरह का विनिमय सिस्टम चल रहा था, जिसके तहत कई लोगों को रेलवे में नौकरी दी गई और बदले में उनके या उनके परिजनों की जमीन ली गई। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार आपराधिक षड्यंत्र का हिस्सा थे, जबकि अन्य आरोपियों ने इस षड्यंत्र को अंजाम देने में मदद की। हालांकि, जिन 52 आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाए गए, इसलिए अदालत ने उन्हें आरोपमुक्त कर दिया।
इस मामले में अदालत ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 और 120बी के तहत आरोप तय किए हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट) की धारा 13(1)(डी) और 13(2) के तहत भी आरोप तय किए गए हैं। गौरतलब है कि लैंड फॉर जॉब मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान रेलवे में नियुक्तियों के बदले लोगों से जमीन ली गई।
