श्रीहरिकोटा, 4 सितंबर। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इसरो के GSLV-F17 रॉकेट ने अत्याधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-05 (जियो इमेजिंग सैटेलाइट) को सफलतापूर्वक उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया। इसके साथ ही मिशन सफलतापूर्वक पूरा हो गया। इसरो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मिशन की सफलता की जानकारी देते हुए कहा, “मिशन सफल! GSLV-F17 ने EOS-05 को तय कक्षा में स्थापित करके अपना मिशन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।”
2,367 किलोग्राम के सबसे भारी सैटेलाइट को कक्षा में पहुंचाया
सफल प्रक्षेपण के बाद इसरो प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने कहा कि GSLV-F17 ने 2,367 किलोग्राम वजनी EOS-05 को सटीक रूप से निर्धारित कक्षा में स्थापित किया है। उन्होंने बताया कि यह श्रीहरिकोटा से 107वां लॉन्च और GSLV का 19वां मिशन है। उन्होंने कहा कि GSLV के शुरुआती मिशनों के बाद लगातार इसके स्ट्रक्चरल मास को ऑप्टिमाइज किया गया और प्रोपल्शन सिस्टम में सुधार किए गए। इसी का नतीजा है कि आज इसी लॉन्च व्हीकल के जरिए 2,367 किलोग्राम वजन वाले सबसे भारी सैटेलाइट को कक्षा में स्थापित किया गया।
नागरिकों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएगा EOS-05
इसरो प्रमुख ने कहा कि अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट लगातार भारत की निगरानी और स्कैनिंग करेगा। इससे प्राप्त डेटा का इस्तेमाल कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सैटेलाइट को लेकर ‘जासूसी’ शब्द का इस्तेमाल करना उचित नहीं है। इसके जरिए प्राप्त होने वाला डेटा देश के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने समेत कई महत्वपूर्ण कार्यों में मददगार साबित होगा।
Gaganyaan मिशन पर भी बड़ा अपडेट
डॉ. वी. नारायणन ने Gaganyaan मिशन को टेक्नोलॉजी-प्रधान मिशन बताते हुए कहा कि इसमें इंसानों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए लॉन्च व्हीकल की ह्यूमन-रेटिंग, क्रू एस्केप सिस्टम और एनवायरनमेंटल कंट्रोल सिस्टम विकसित करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 8,000 टेस्ट पूरे किए जा चुके हैं। क्रू वाले मिशन से पहले तीन बिना क्रू वाले मिशनों की योजना बनाई गई है। पहला अनक्रूड मिशन इस साल लॉन्च के लिए तैयार किया जा रहा है। उसके परिणामों की समीक्षा के बाद दो और बिना क्रू वाले मिशन किए जाएंगे और इसके बाद मानवयुक्त मिशन की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा।
EOS-05 की क्या है खासियत?
इसरो के मुताबिक, EOS-05 एक अत्याधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन स्पेसक्राफ्ट है। यह जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट है। इसमें विजिबल, इन्फ्रारेड, मल्टी-स्पेक्ट्रल और हाइपर-स्पेक्ट्रल बैंड में एडवांस्ड इमेजिंग की क्षमता है। GSLV-F17 मिशन में चार मीटर व्यास वाले ओजाइव कम्पोजिट ढांचे वाले पेलोड फेयरिंग का इस्तेमाल किया गया। रॉकेट ने EOS-05 को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया।
जितेंद्र सिंह ने दी इसरो टीम को बधाई
परमाणु ऊर्जा विभाग में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी मिशन की सफलता पर इसरो की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि EOS-05 अत्याधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है और जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की अंतरिक्ष क्षमताएं लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही हैं और देश की वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में स्थिति मजबूत हो रही है।


