ईरान का अमेरिका पर बड़ा आरोप : बातचीत से पहले ही तोड़ीं युद्धविराम की तीन शर्तें, भविष्य की चर्चाओं पर संकट
तेहरान, 9 अप्रैल। अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही विवादों में घिर गई है। ईरान ने आधिकारिक तौर पर आरोप लगाया है कि अमेरिका ने 10 बिंदुओं वाले शांति प्रस्ताव की तीन महत्वपूर्ण शर्तों का उल्लंघन किया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाग़र ग़ालिबाफ़ ने एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों में बातचीत करना अब तर्कसंगत नहीं रह गया है। स्पीकर ग़ालिबाफ़ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर जारी अपने बयान में कहा कि अमेरिका की वादे तोड़ने की पुरानी आदत रही है। उन्होंने उन तीन विशिष्ट शर्तों का उल्लेख किया जिनका उल्लंघन हुआ है:
- लेबनान में युद्धविराम का अभाव: प्रस्ताव की पहली शर्त लेबनान में शांति से जुड़ी थी। ईरान का कहना है कि वहां हमले जारी हैं, जबकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने भी स्पष्ट किया था कि युद्धविराम लेबनान सहित सभी क्षेत्रों में तुरंत प्रभावी होना चाहिए।
- हवाई सीमा का उल्लंघन: ईरान ने दावा किया कि उसके फ़ार्स प्रांत के लार शहर में एक घुसपैठ करने वाले ड्रोन को गिराया गया है। यह घटना ईरान की हवाई सीमा का सम्मान करने वाली शर्त का सीधा उल्लंघन है।
- परमाणु संवर्धन अधिकार: प्रस्ताव की छठी शर्त में ईरान के संवर्धन (Enrichment) के अधिकार को स्वीकार करने की बात थी, लेकिन अब इससे इनकार किया जा रहा है।
ग़ालिबाफ़ ने दोटूक शब्दों में कहा कि जब प्रस्ताव को बातचीत शुरू होने से पहले ही तोड़ दिया गया है, तो ऐसे में दोतरफा युद्धविराम या आगे की चर्चा का कोई आधार नहीं बचता। उन्होंने अमेरिका के उस ‘पैटर्न’ की आलोचना की जिसमें वह प्रस्ताव को ‘आधार’ तो मानता है, लेकिन उसकी शर्तों का पालन नहीं करता। गौरतलब है कि पाकिस्तान इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने दोनों देशों के प्रतिनिधियों को 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में अगले दौर की बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। हालांकि, ईरान के इन ताजा आरोपों के बाद इस बैठक की सफलता पर सवालिया निशान लग गए हैं।
