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ट्रंप की शर्तें नहीं मान रहा ईरान, जिनेवा में परमाणु वार्ता के बाद बोले जेडी वेंस- हमले का विकल्प खुला

ट्रंप की शर्तें नहीं मान रहा ईरान, जिनेवा में परमाणु वार्ता के बाद बोले जेडी वेंस- हमले का विकल्प खुला

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वॉशिंगटन, 18 फरवरी। अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस का कहना है कि ईरानी पक्ष डिप्लोमैटिक समाधान के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से तय की गई सभी रेड लाइन (शर्तों) को नहीं मान रहा है। ऐसे में अमेरिका की ओर से ईरान पर सैन्य हमले के विकल्प को खारिज नहीं किया जा रहा है।

जिनेवा में परमाणु वार्ता के दूसरे दौर की वार्ता के बाद जेडी वेंस ने अपने बयान में ने कहा, ‘यह बातचीत कुछ लिहाज से ठीक रही है। वे लोग बातचीत के लिए आए, जो कि अच्छा संकेत है। हालांकि कई मामले अब भी अनसुलझे हैं। दरअसल प्रेसिडेंट ट्रंप ने बहुत साफ-साफ कुछ रेड लाइन्स तय की हैं, जिन्हें मानने और उन पर काम करने को ईरानी सरकार तैयार नहीं है।’

वार्ता विफल हुई तो फिर डोनाल्ड ट्रंप फैसला लेंगे

वेंस ने आगे कहा, ‘हम बातचीत को तरजीह दे रहे हैं और इस पर काम करते रहेंगे। हम जानते हैं कि इसमें सख्त कदम उठाने का अधिकार अमेरिकी प्रेसिडेंट के पास है। वह यह तय करेंगे कि बातचीत से कोई फायदा नहीं हो रहा है तो फिर आगे क्या करना है। हमें उम्मीद करते हैं कि वार्ता का नतीजा निकले, लेकिन ये विफल हुई तो फिर प्रेसिडेंट फैसला लेंगे।’

इसके पूर्व अमेरिका और ईरान की मंगलवार को जिनेवा में परमाणु वार्ता हुई। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने लगभग तीन घंटे तक चली वार्ता को सकारात्मक बताया है। तेहरान के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत को अमेरिका की ओर से भी अच्छी कहा गया है। हालांकि ट्रंप बातचीत के बावजूद सैन्य हमले की धमकियां भी लगातार दे रहे हैं।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर विवाद

अमेरिका, इजराइल और पश्चिम के देशों ने बीते कुछ वर्षों में बार-बार कहा है कि ईरान परमाणु बम बन रहा है। दूसरी ओर ईरान ने इससे साफ इनकार किया है। डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ईरान को न्यूक्लियर वेपन हासिल करने से रोकने के सभी विकल्प खुले हैं। अमेरिका को जरूरत लगेगी तो ईरान में हमला किया जा सकता है।

परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर ईरान-अमेरिका में लंबे समय से तनातनी है और इसको लेकर दोनों देशों में बातचीत भी चल रही है। गत वर्ष अमेरिका के हमले के चलते कुछ समय रुकने के बाद बातचीत एक बार फिर शुरू हुई है। दुनिया उम्मीद कर रही है कि बातचीत के जरिए चीजों का हल निकले और जंग जैसी कोई सूरत ना पैदा हो।

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