हनुमान जी हमारे पहले और एक मात्र सुपर हीरो
By Varsha Pargat
सभी को हनुमान जयंती की शुभकामनाएं !
भगवान हनुमान जो चिरंजीवी माने जाते हैं वह आज भी हमारे आसपास है ऐसा हम विश्वास रखते हैं. वह बलशाली और बुद्धिमान है. अपार भक्ति, श्रद्धा और सामर्थ्य के प्रतीक है. हनुमान जी बुद्धि के देवता भी माने जाते हैं, परंतु हनुमान हमें सदैव सिखाते रहते हैं, प्रेरणा देते रहते हैं. उन्होंने अपने जीवन काल में हमेशा सिखा.
अपनी माता अंजनी और पिता केसरी से उन्होंने ज्ञान प्राप्त किया. इसका मतलब कि उन्होंने अपनी माता-पिता को पहले अपना गुरु बनाया. हनुमान जी को पवन पुत्र भी मानते हैं. वायु देवता उनके धर्म पिता है. उनसे भी उन्होंने ज्ञान अर्जित किया .साथ-साथ ऋषि मातंग और भगवान सूर्य से उन्होंने विद्या ग्रहण किया. पौराणिक कथा के अनुसार हनुमान जी भगवान सूर्य से शिक्षा प्राप्त करना चाहते थे. इसी हेतु वे भगवान सूर्य के पास पहुंचे और उनसे शिक्षा देने का निवेदन किया. भगवान सूर्य ने हनुमान जी से अपनी असमर्थता जताई . उन्होंने हनुमान जी से कहा कि सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक वह निरंतर घूमते रहते हैं. सूर्यास्त के बाद उन्हें विश्राम की आवश्यकता होती है. इसलिए वह उनको शिक्षा नहीं दे पाएंगे, समय ही नहीं है , वह एक जगह स्थिर रहकर हनुमान जी को शिक्षा नहीं दे पाएंगे.
हनुमान जी ने उनकी समस्या को समझI और विनंती की वह उनके साथ चलते-चलते ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं. सूर्य भगवान ने तुरंत स्वीकार किया. हनुमान जी सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक उनके साथ रहते थे और उस दौरान ज्ञान प्राप्त करते. इस तरह हनुमान जी ने ज्ञान प्राप्ति की और हमको यह सीखते हैं कि अगर आपकी तीव्र इच्छा हो तो आप कभी भी ज्ञान प्राप्त कर सकते हो.
यह भी पढेंः हनुमान जयंती आज : अमित शाह व सीएम योगी समेत कई नेताओं ने देशवासियों को दी शुभकामनाएं
हनुमान जी में बुद्धि के साथ सही नियोजन करने की क्षमता थी. भगवान राम ने उन्हें जो भी कार्य सोपI वह उन्होंने उत्तम नियोजन और कार्य कुशलता के बल पर सफल करके दिखाया. उनके रास्ते में जो समस्या आई उसको पार करते हुए एक आदर्श स्थापित किया.
हनुमान जी ने लंका पहुंचने से पहले अपनी पूरी रणनीति बनाई. असुरों का सामना होने पर अपनी बुद्धिमत्ता का उपयोग करते हुए उनको सबक सिखाया. भय फैलाने के लिए लंका को जलाया. रावण के भाई विभीषण को प्रभु राम से मिलाया. उन्होंने श्री राम से विभीषण की मैत्री करवाई.
हनुमान जी ने अदम्य साहस है. वह किसी भी प्रकार की विपरीत परिस्थितियों से विचलित नहीं हुए और तीव्र इच्छा शक्ति से अपने कार्य करते रहे. हनुमान जी सर्वशक्तिमान थे परंतु उतने ही विनम्र. हनुमान जी ने लंका को जलाया. कई असुरों का संहार किया. भगवान शनि का घमंड चूर किया, भीम का घमंड चूर किया, अर्जुन का घमंड चूर किया, बलराम का चूर किया और संपूर्ण जगत को यह जता दिया कि वह क्या है. परंतु उन्होंने कभी भी खुद विनम्रता और भक्ति का साथ नहीं छोड़ा. रावण से भी विनम्र रूप में ही पेश आए और अर्जुन से भी. सभी के समक्ष विनम्र रहकर ही उन्होंने समझाया.
यह भी पढेंः लाल आतंक का अंत
परंतु जब वे नहीं समझे तो प्रभु की आज्ञा से ही अपना पराक्रम दिखाया. हनुमान जी कभी हार नहीं माने. समुद्र पार करने से लेकर संजीवनी बूटी लाने तक इस पूरे प्रसंग में उनका संकल्प दिखता है. चुनौतियI जीवन का हिस्सा है लेकिन लगन से, अविश्वसनीय उपलब्धियां हासिल की जा सकती है. आज के समय में उनसे कई सारी बातें हम अपने जीवन में सीख सकते हैं. जब दुनिया बहुत सारी समस्याओं से घिरी है तब हनुमान जी हमें मार्ग दिखाते हैं. निरंतर प्रयास करने का और आगे बढ़ने का.
Please share your views varshapargat@yahoo.co.in
