5 राज्यों में विधानसभा चुनाव की कवायद : उप निर्वाचन आयुक्तों ने तैयारियों का जायजा लेना शुरू किया

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव कराने की तैयारी के बीच उप निर्वाचन आयुक्तों के नेतृत्व में आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इन राज्यों में तैयारियों का जायजा लेना शुरू कर दिया है। आयोग की एक टीम फिलहाल उत्तराखंड के दौरे पर है।

उत्तर प्रदेश के दौरे को लेकर अब तक कोई जानकारी नहीं

ईसी के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि आने वाले दिनों में अधिकारी मणिपुर और पंजाब का दौरा करेंगे। गोवा का दौरा भी प्रस्तावित था, लेकिन अब यात्रा की तारीखों में बदलाव किया जा रहा है। वहीं, उत्तर प्रदेश के दौरे को लेकर अब तक कोई जानकारी नहीं है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा की 403 सीटों पर चुनाव होना है।

यूपी विधानसभा का कार्यकाल अगले वर्ष 22 मई को समाप्त होगा

आमतौर पर चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से पहले मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों वाली ‘पूर्ण आयोग’ की टीम चुनाव वाले राज्यों का दौरा करती है। उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल अगले वर्ष 22 मई को समाप्त हो रहा है जबकि 60 सदस्यीय मणिपुर, 40 सदस्यीय गोवा, 117 सदस्यीय पंजाब और 70 सदस्यीय उत्तराखंड विधानसभा का कार्यकाल मार्च, 2027 में अलग-अलग तारीखों पर समाप्त होगा।

यूपी व गोवा ने शुरू की EVM व वीवीपैट मशीनों की FLC

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के प्रावधान निर्वाचन आयोग को विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से छह महीने से पहले भी चुनाव कराने की अनुमति देते हैं। चुनाव की तैयारियों के तहत उत्तर प्रदेश और गोवा ने मतदान में इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) और वीवीपैट मशीनों की ‘प्रथम स्तर की जांच’ (FLC) शुरू कर दी है।

एफएलसी के दौरान इन दोनों उपकरणों में तकनीकी खामियों की जांच भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल) के इंजीनियर करते हैं। ये दोनों सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनियां इन उपकरणों का निर्माण करती हैं। खराब मशीनों को मरम्मत या बदलने के लिए निर्माताओं के पास वापस भेज दिया जाता है।

चुनाव की तैयारियों में FLC एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया

राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में दोनों मशीनों की जांच के लिए ‘मॉक पोल’ भी कराया जाता है। चुनाव की तैयारियों में एफएलसी एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। निर्वाचन आयोग एक कैलेंडर जारी करता है, जिसका राज्यों को पालन करना होता है। मशीनों की ये जांच भी उसी कार्यक्रम का हिस्सा है। एफएलसी के दौरान कंट्रोल यूनिट और बैलेट यूनिट में पिछले चुनावों से जुड़ा कोई भी डेटा पूरी तरह मिटा दिया जाता है।

सभी जांचों में सफल होने वाली यूनिट पर ‘एफएलसी ओके’ का निशान लगाया जाता है और चुनाव की तैयारियों के अगले चरणों से पहले अनधिकृत पहुंच रोकने के लिए उसे विशेष गुलाबी कागजी सील से सील कर दिया जाता है। एक ईवीएम में कम से कम एक बैलेट यूनिट, एक कंट्रोल यूनिट और एक वीवीपैट मशीन होती हैं।

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