चक्रवात मुरासु का आंध्र प्रदेश तट पर लैंडफॉल, 110 किमी की रफ्तार से चली हवाएं; 5 राज्यों में NDRF की 37 टीमें तैनात

नई दिल्ली, 3 नवंबर। बंगाल की खाड़ी में बना गंभीर चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ सोमवार देर रात करीब 1 बजे आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र से टकरा गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, चक्रवात ने नेल्लोर और नरसापुर के बीच ओंगोल के निकट तट को पार किया। लैंडफॉल के दौरान तटीय इलाकों में 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं, जबकि हवा के झोंकों की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई। तूफान के प्रभाव से आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु के कई इलाकों में भारी बारिश हो रही है। समुद्र में ऊंची लहरें उठने से तटीय क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

चक्रवात के खतरे को देखते हुए पांच राज्यों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की 37 टीमें तैनात की गई हैं। वहीं, खराब मौसम के कारण कई हवाई अड्डों पर उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं। ओडिशा में करीब 1.6 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में भारी बारिश से कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है।

उड़ानें रद्द, पांच राज्यों में NDRF की 37 टीमें तैनात

चक्रवात के गंभीर खतरे को देखते हुए आपदा प्रबंधन और नागरिक उड्डयन विभाग अलर्ट मोड पर हैं। खराब मौसम के कारण आंध्र प्रदेश के तीन प्रमुख हवाई अड्डों से संचालित होने वाली 19 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। वहीं, चेन्नई एयरपोर्ट पर भी 11 उड़ानों को निरस्त करना पड़ा है।

राहत और बचाव कार्यों के लिए पांच राज्यों में NDRF की कुल 37 टीमें तैनात की गई हैं। इनमें 13 टीमें अकेले आंध्र प्रदेश में राहत और बचाव कार्यों में जुटी हैं। तमिलनाडु के अरक्कोनम से 90 जवानों वाली NDRF की तीन टीमें नेल्लोर, प्रकाशम और मार्कापुरम में भेजी गई हैं। आंध्र प्रदेश के बापटला, कृष्णा और प्रकाशम जिले तूफान से सबसे अधिक प्रभावित बताए जा रहे हैं। ओंगोल के कोथापटनम बीच और चिराला में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हो रही है।

ओडिशा में 1.6 लाख लोगों का रेस्क्यू, दक्षिणी जिलों में हाई अलर्ट

चक्रवात के खतरे को देखते हुए ओडिशा सरकार ने बड़े पैमाने पर एहतियाती कदम उठाए हैं। गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट और मलकानगिरी जिलों के संवेदनशील तटीय और निचले इलाकों से करीब 1.6 लाख लोगों को निकालकर सुरक्षित राहत शिविरों में पहुंचाया गया है।

पुरी और आसपास के इलाकों में समुद्र में ऊंची लहरें उठ रही हैं और मूसलाधार बारिश जारी है। रायगड़ा जिले के सभी 11 फायर स्टेशनों को अलर्ट पर रखा गया है। इसके अलावा राज्य में NDRF, ODRAF और ओडिशा फायर सर्विस के 300 से अधिक बचाव दल तैनात किए गए हैं। मौसम विभाग ने चक्रवात के व्यापक प्रभाव को देखते हुए मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल, तेलंगाना, कर्नाटक और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में भी भारी बारिश और तेज हवाओं की आशंका जताई है।

चेन्नई में 11 सेंटीमीटर बारिश, कई इलाकों में जलभराव

चक्रवात मुरासु का असर तमिलनाडु में भी देखने को मिल रहा है। राजधानी चेन्नई और आसपास के जिलों में पिछले 24 घंटों के दौरान भारी बारिश दर्ज की गई है। चेन्नई के माधवरम में सबसे अधिक 11 सेंटीमीटर बारिश हुई, जबकि एन्नोर पोर्ट और नुंगमबक्कम में 10-10 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई।

भारी बारिश के कारण शहर के दो सबवे में पानी भर गया। जलभराव की समस्या दूर करने के लिए नगर निगम की ओर से पंप और अतिरिक्त मोटरें लगाई गई हैं। वहीं, तिरुवल्लूर जिले के पझावेर्काडु में समुद्र में करीब छह फीट ऊंची लहरें उठ रही हैं। प्रशासन ने तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

क्या है मुरासु नाम का अर्थ? एक सप्ताह में दूसरा बड़ा तूफान

चक्रवात मुरासु का नाम भारत ने दिया है। तमिल भाषा में ‘मुरासु’ का अर्थ प्राचीन वाद्य यंत्र या युद्ध का नगाड़ा होता है। पुराने समय में इसका इस्तेमाल लोगों तक संदेश पहुंचाने और महत्वपूर्ण सूचनाएं देने के लिए किया जाता था। बंगाल की खाड़ी में एक सप्ताह के भीतर यह दूसरा बड़ा चक्रवाती तूफान बताया जा रहा है। इससे पहले 28 अक्टूबर को चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ आंध्र प्रदेश के तट से टकराया था।

उस दौरान हवाओं की रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई थी। इस तूफान के कारण आंध्र प्रदेश और ओडिशा में छह लोगों की मौत हुई थी, जबकि बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा था। लगातार दो चक्रवाती तूफानों के प्रभाव से पूर्वी और दक्षिणी भारत के कई राज्यों में मौसम की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। ऐसे में प्रशासन ने राहत और बचाव कार्यों के साथ-साथ संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है।

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