NEET UG पेपर लीक केस : CBI ने 13 आरोपितों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट, NTA के 3 विशेषज्ञ भी शामिल
नई दिल्ली, 28 जुलाई। NEET UG परीक्षा पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मंगलवार को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में 13 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी। यह चार्जशीट CBI की आर्थिक अपराध शाखा की तरफ से दाखिल की गई है।
CBI सूत्रों के अनुसार चार्जशीट को पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा। मामले में गिरफ्तार सभी 13 आरोपित फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
इन आरोपितों के खिलाफ दाखिल की गई है चार्जशीट
केंद्रीय जांच एजेंसी ने जिन 13 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, उनमें मनीषा मंधारे (NTA बायोलॉजी विशेषज्ञ), प्रह्लाद विठ्ठलराव कुलकर्णी (NTA केमिस्ट्री विशेषज्ञ), मनीषा संजय हवालदार (NTA फिजिक्स विशेषज्ञ), शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर (RCC कोचिंग इंस्टीट्यूट, लातूर के मालिक) व तेजस हर्षदकुमार शाह (APMA कोचिंग इंस्टीट्यूट, पुणे में फिजिक्स फैकल्टी और COO) के अलावा आठ बिचौलिए – मनीषा संजय वाघमारे, धनंजय निवृत्ति लोखंडे, शुभम माधुकर खैरनार, यश यादव, मंगलिलाल बिवाल, विकास बिवाल, दिनेश बिवाल व डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे शामिल हैं।
चार्जशीट में 360 गवाहों, 422 दस्तावेजों और 43 अहम सबूत शामिल
जांच एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में 360 गवाहों, 422 दस्तावेजों और 43 अहम सबूतों को शामिल किया है। उसका कहना है कि मामले की जांच के दौरान पेपर लीक की पूरी कड़ी का पता लगाया गया है। एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि लीक हुए प्रश्नपत्र के स्रोत और उसे अभ्यर्थियों तक पहुंचाने वाले लोगों की पहचान की गई है।
आरोपितों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, विश्वासघात, सबूत मिटाने, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और पब्लिक एग्जामिनेशन अधिनियम, 2024 के तहत काररवाई की गई है। इस मामले में BNS 2023 की धारा 315(5), 318(4), 61(2), 238 और 303(2) के तहत केस दर्ज किया गया है। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(2) और 13(1)(a) के तहत भी काररवाई की गई है। वहीं पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट, 2024 की धारा 10 के साथ धारा 3, 4, 5 और 11 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।
12 मई को दर्ज हुई थी FIR
CBI के मुताबिक, यह मामला तीन मई, 2026 को आयोजित NEET UG परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों के बाद सामने आया था। इसके बाद केंद्र सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने 12 मई 2026 को CBI को शिकायत दी थी। इसी शिकायत के आधार पर उसी दिन एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच के लिए CBI ने 72 अधिकारियों और आठ साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की कई टीमें बनाई थीं।
आरोपितों के बैंक खाते और डीमैट खाते किए गए फ्रीज
एजेंसी ने महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली समेत कई राज्यों में 92 जगहों पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान CBI ने मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल डिवाइस, दस्तावेज और अन्य अहम सबूत बरामद किए। इन सभी की फॉरेंसिक जांच कराई गई।
CBI के अनुसार इस मामले में पहली गिरफ्तारी 13 मई, 2026 को हुई थी। अब तक कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी NTA से जुड़े केमिस्ट्री, बायोलॉजी और फिजिक्स के तीन विषय विशेषज्ञ भी शामिल हैं।
जांच में कई बिचौलियों की भी पहचान हुई है. आरोप है कि इन लोगों ने लीक प्रश्नपत्र हासिल कर आगे अभ्यर्थियों तक पहुंचाया। CBI ने दो कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोगों को भी गिरफ्तार किया है। इन पर लीक पेपर खरीदने और उसका इस्तेमाल करने का आरोप है।
डिजिटल सबूतों की हुई जांच
CBI ने जांच के दौरान आरोपियों के बैंक खातों, बैंक लॉकर और एक डीमैट खाते को भी फ्रीज किया है। एजेंसी को डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट, हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की राय और विषय विशेषज्ञों की रिपोर्ट मिली है। एजेंसी का कहना है कि इन रिपोर्टों से यह पुष्टि हुई है कि परीक्षा से पहले ही लीक हुए प्रश्नों का प्रसार किया गया था।
फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर आगे भी हो सकती है काररवाई
एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। फॉरेंसिक विश्लेषण और सामने आने वाले नए तथ्यों के आधार पर आगे भी काररवाई की जा सकती है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामले की सुनवाई विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी। अदालत में पेश किए गए सबूतों और गवाहों के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
