विधानसभा चुनाव : असम व पुडुचेरी ने रचा इतिहास, केरल में भी मजबूत भागीदारी, रिकॉर्ड वोटिंग ने बढ़ाया लोकतंत्र का मान
नई दिल्ली, 9 अप्रैल। विधानसभा चुनावों के तहत गुरुवार को हुई वोटिंग में असम और पुडुचेरी ने नए इतिहास का सृजन कर दिया, जहां रिकॉर्ड भागीदारी हुई। वहीं केरल में भी मतदाताओं की मजबूती भागीदारी देखने को मिली। यह रिकॉर्ड वोटिंग निश्चित रूप से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।
50 वर्षों में सर्वाधिक मतदान
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के अनुसार, असम और पुडुचेरी में अब तक का सर्वाधिक मतदान दर्ज किया गया जबकि केरल में भी मजबूत और संतुलित भागीदारी देखने को मिली। पिछले 50 वर्षों में यह सबसे अधिक मतदान प्रतिशत है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने दी बधाई
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार (CEC) ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि करार देते हुए कहा कि ये चुनाव न केवल भारत बल्कि वैश्विक लोकतंत्र के लिए भी एक मिसाल हैं।
मतदान प्रतिशत के आंकड़े
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार – असम में 85.38% मतदान हुआ (2016 के 84.67% से अधिक), पुडुचेरी में 89.83% मतदान (2011 के 86.19% से ज्यादा) और केरल में 78.03% मतदान दर्ज किया गया।
General Elections to Legislative Assemblies and Bye-elections 2026
Assam and Puducherry record highest-ever poll participation ✅
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— Election Commission of India (@ECISVEEP) April 9, 2026
महिलाओं की बढ़ी भागीदारी
तीनों राज्यों में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही और कई स्थानों पर पुरुषों से अधिक महिलाओं का मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया। यह चुनावी जागरूकता और सामाजिक बदलाव का सकारात्मक संकेत है।
63,084 मतदान केंद्रों पर शांतिपूर्ण मतदान संपन्न
चुनाव आयोग ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत मतदाता सूची की पारदर्शिता और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया ने जनता का भरोसा मजबूत किया है, जिससे रिकॉर्ड मतदान संभव हुआ। इस बार 100% मतदान केंद्रों पर लाइव वेबकास्टिंग की गई, जिससे निगरानी और पारदर्शिता में बड़ा सुधार हुआ। कुल 63,084 मतदान केंद्रों पर शांतिपूर्ण मतदान संपन्न हुआ।
296 विधानसभा सीटों पर 1,899 उम्मीदवार, 5.31 करोड़ से ज्यादा वोटरों की भागीदारी
तीनों राज्यों की कुल 296 विधानसभा सीटों (असम-126, केरल-140, पुडुचेरी–30) पर मतदान हुआ, जिसमें 5.31 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने हिस्सा लिया। 1,899 उम्मीदवार मैदान में थे और लाखों मतदानकर्मी तैनात किए गए। दिव्यांग मतदाताओं के लिए ह्वीलचेयर, स्वयंसेवक और परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, जिससे उनकी भागीदारी में वृद्धि हुई।
वैश्विक स्तर पर बढ़ी विश्वसनीयता
चुनाव प्रक्रिया को देखने के लिए 22 देशों के 38 प्रतिनिधि मौजूद रहे, जिससे भारतीय चुनाव प्रणाली की अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता और मजबूत हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ऐतिहासिक मतदान भारत के लोकतंत्र को और मजबूत, समावेशी और भरोसेमंद बनने का संकेत देता है।
