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ईरान युद्ध में शामिल न होने पर नाराज ट्रंप बोले- ‘NATO देश कायर, अमेरिका के बिना वे कागजी शेर…’

ईरान युद्ध में शामिल न होने पर नाराज ट्रंप बोले- ‘NATO देश कायर, अमेरिका के बिना वे कागजी शेर…’

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वॉशिंगटन, 20 मार्च। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध में नाटो देशों के शामिल न होने को लेकर शुक्रवार को उनके खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने नाटो के सहयोगी देशों को जमकर खरी-खोटी सुनाई और उन्हें ‘कायर’ तक कह दिया।

ट्रुथ सोशल पर एक तीखी पोस्ट में ट्रंप ने इस गंठबंधन को बिना अमेरिकी समर्थन के ‘कागजी शेर’ बताया। उन्होंने NATO देशों की इस बात के लिए आलोचना की कि वे तेल की ऊंची कीमतों की शिकायत तो करते हैं, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित करने में मदद नहीं करना चाहते।

ट्रंप ने कहा, ‘अमेरिका के बिना नाटो देश सिर्फ कागजी शेर है। वे परमाणु शक्ति संपन्न ईरान को रोकने की लड़ाई में शामिल नहीं होना चाहते। अब जब वह लड़ाई सैन्य रूप से जीत ली गई है और खतरा बहुत कम हो गया है, तो तेल की ऊंची कीमतों की शिकायत करते हैं, जो उन्हें चुकानी पड़ रही है। लेकिन वे होर्मुज स्ट्रेट को खोलने में मदद नहीं करना चाहते, जो एक साधारण सैन्य कदम है और तेल की ऊंची कीमतों का एकमात्र कारण भी। उनके लिए ऐसा करना कितना आसान है और इसमें जोखिम भी कितना कम है। कायरों, हम इसे याद रखेंगे।’

नाटों देशों का लड़ाई में शामिल होने से इनकार

ट्रंप की ये टिप्पणियां तब आईं, जब कई देशों ने होर्मुज स्ट्रेट से व्यापारी जहाजों को सुरक्षा देने के लिए युद्धपोत तैनात करने के उनके आह्वान पर प्रतिक्रिया नहीं दी या इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया।

होर्मुज स्ट्रेट एक महत्वपूर्ण जलमार्ग

होर्मुज स्ट्रेट एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है, जिससे दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा कच्चा तेल गुजरता है। यह गतिरोध तब पैदा हुआ, जब होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर ईरानी हमलों और खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों की लहरों के बाद वैश्विक तेल की कीमतें 40% से 50% तक बढ़ गईं। ये हमले गत 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा शुरू किए गए युद्ध की जवाबी काररवाई के तौर पर किए गए थे।

सैन्य अभियान के लिए सहयोगियों के समर्थन की जरूरत नहीं – ट्रंप

इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका को ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखने के लिए अपने सहयोगियों के समर्थन की आवश्यकता नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि नाटो के कई देशों ने इस अभियान में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया।

इराक के संदर्भ में अपनी स्थिति में बदलाव कर रहे – नाटो

वहीं नाटो की प्रवक्ता एलिसन हार्ट ने कहा, ‘हम नाटो मिशन इराक के संदर्भ में अपनी स्थिति में बदलाव कर रहे हैं। हम सहयोगियों और भागीदारों के साथ समन्वय में काम कर रहे हैं। हमारे कर्मियों की सुरक्षा और सुरक्षा सर्वोपरि है।’ हालांकि नाटो की प्रवक्ता ने इस बारे में अधिक जानकारी नहीं दी। नाटो और इराक के बीच राजनीतिक संवाद और व्यावहारिक सहयोग जारी रहेगा।

चीन और हिन्द-प्रशांत क्षेत्र पर वॉशिंगटन का जोर

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका यूरोप पर दबाव डाल रहा है कि वह अपनी रक्षा की जिम्मेदारी खुद संभाले। अमेरिका की रणनीति में यह बदलाव भारत के लिए सीधे तौर पर मायने रखता है क्योंकि वॉशिंगटन, चीन और हिन्द-प्रशांत क्षेत्र पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है।

हालांकि अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सशस्त्र सेवा समिति की सुनवाई में अमेरिकी सांसदों और रक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नाटो अमेरिकी रणनीति का केंद्र बना हुआ है। अध्यक्ष माइक रोजर्स ने यूरोप में अमेरिकी सेनाओं की समय से पहले कटौती के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि समय से पहले सेनाओं की वापसी से रूस की आक्रामकता को बढ़ावा मिलेगा।

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