स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के धरने पर शर्तों को लेकर अखिलेश यादव ने उठाए सवाल, सरकार और प्रशासन की कड़ी आलोचना की
लखनऊ, 11 मार्च। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग को लेकर बुधवार को यहां धरने पर बैठ गए हैं। धरने को लेकर लखनऊ प्रशासन ने अनुमति देने के साथ करीब दो दर्जन शर्तें लगा दी हैं। शर्तों को लेकर समर्थकों में भी नाराजगी देखी जा रही है। वहीं इन शर्तों को लेकर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने गंभीर सवाल उठाए हैं और राज्य सरकार और प्रशासन की कड़ी आलोचना की है।
सरकार यह भी तय कर दे कि आंख और मुंह कितने सेंटीमीटर तक खोले जा सकते हैं
अखिलेश यादव ने अपने आधिकारिक X अकाउंट से पोस्ट करते हुए तंज कसा कि सरकार को यह भी तय कर देना चाहिए कि ‘आंख और मुंह कितने सेंटीमीटर तक खोले जा सकते हैं।’ अखिलेश यादव ने लिखा कि किसी को ‘हाता नहीं भाता’, इसलिए वह ‘शर्तों’ का अंबार लगाता है। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा सनातन का सम्मान नहीं कर सकती तो कम से कम उसका अपमान भी न करे। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की सरकार एक समाज विशेष के सम्मान को ठेस पहुंचा रही है।
आँख और मुँह कितने सेंटीमीटर खुल सकते हैं, ये शर्त भी रख देते…
किसी को ‘हाता नहीं भाता’, इसीलिए वो ‘शर्तों’ का है अंबार लगाता।
भाजपाई सनातन का सम्मान नहीं कर सकते हैं तो भले न करें परंतु अपमान भी न करें। उप्र की अहंकारी सरकार जिस समाज विशेष के मान की बाँह मरोड़ रही है, वो बात…
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) March 11, 2026
सपा प्रमुख ने कहा कि भाजपा सरकार में मंत्री, सांसद, विधायक या अन्य जनप्रतिनिधि भी इस मुद्दे पर अपने समाज से नजरें चुरा रहे हैं। जो लोग भाजपा की ‘भट्टी पर अपने स्वार्थ की रोटी सेंक रहे हैं’, वे अपने ही समाज में सम्मान खो चुके हैं और जनता आने वाले चुनाव में उन्हें सबक सिखाएगी।
कोविड नियमों को लेकर भी सवाल उठाया
अखिलेश यादव ने कोविड नियमों को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या कोविड 19 अब भी चल रहा है? अगर ऐसा है तो सरकार बताए कि उसकी किस बैठक या भाजपा के किस कार्यक्रम में आखिरी बार इसका पालन हुआ था। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या भाजपा नेताओं की बैठकों में भी यही नियम लागू होते हैं।
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश ने कहा, ‘अतार्किक बंदिशें लगाना कमजोर सत्ता की पहचान होती है।’ उन्होंने इस पूरे मामले को निंदनीय तथा घोर आपत्तिजनक बताया। वहीं, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग लंबे समय से की जा रही है और इसी मांग को लेकर वह धरने पर बैठे हैं।
