एशियाई पैरा खेल : भारत की शानदार शुरुआत, पहले दिन पैरा एथलीटों की अगुआई में 3 स्वर्ण सहित 11 पदक जीते

नागोया, 19 अक्टूबर। भारत ने यहां पांचवें एशियाई पैरा खेलों (Aichi-Nagoya 2026 Asian Para Games) में पदक स्पर्धाओं के पहले दिन सोमवार को अपने अभियान की शानदार शुरुआत की और अनुभवी खिलाड़ियों के दमदार प्रदर्शन के बीच पैरा एथलीटों की अगुआई में चार स्वर्ण, पांच रजत व दो कांस्य सहित कुल 11 पदक जीते।

भुजाहीन तीरंदाज शीतल देवी का करिश्माई प्रदर्शन

भुजाहीन तीरंदाज शीतल देवी ने भी करिश्माई प्रदर्शन करते हुए महिलाओं की कंपाउंड स्पर्धा के क्वालीफिकेशन दौर में विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की। इसके बाद उन्होंने तोमन कुमार के साथ मिलकर मिश्रित टीम स्पर्धा में नया विश्व रिकॉर्ड बनाया।


पदक तालिका में भारत चौथे स्थान पर

पहले दिन की पदक स्पर्धाओं के समापन के बाद भारत 11 पदकों के साथ पदक तालिका में जहां चौथे स्थान पर है वहीं चीन 46 पदकों (16+16+14) के साथ सबसे आगे है। उज्बेकिस्तान (6+8+6=20) व मेजबान जापान (5+2+11=18) क्रमशः दूसरे व तीसरे स्थान पर हैं।

शूटर मोना ने 10 मीटर एयर राइफल एसएच1 स्पर्धा में बनाया नया रिकॉर्ड

दरअसल, दिन में भारतीय अभियान की शुरुआत में शूटर मोना अग्रवाल ने की। उन्होंने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल एसएच1 स्पर्धा के फाइनल में शानदार वापसी करते हुए हमवतन अवनि लेखरा को पछाड़कर स्वर्ण पदक जीता।

दो बार की पैरालम्पिक चैम्पियन अवनि लेखरा दूसरे स्थान पर पिछड़ी

पेरिस पैरालम्पिक 2024 की कांस्य पदक विजेता मोना ने छठे स्थान से वापसी करते हुए 250.0 अंक के एशियाई पैरा खेलों के रिकॉर्ड के साथ पहला स्थान हासिल किया। उन्होंने दो बार की पैरालम्पिक चैम्पियन अवनि को महज 0.4 अंक से पीछे छोड़ा।

गत चैम्पियन अवनि ने पैरालम्पिक 2028 के लिए दूसरा कोटा स्थान भी दिलाया

गत चैंपियन के तौर पर उतरीं 24 वर्षीय अवनि को 249.6 अंकों के साथ रजत पदक से संतोष करना पड़ा। अवनि के इस पदक से भारत ने 2028 लॉस एंजेलिस पैरालम्पिक के लिए दूसरा कोटा स्थान भी हासिल कर लिया। मोना ने पिछले माह विश्व निशानेबाजी पैरा स्पोर्ट (डब्ल्यूएसपीएस) चैम्पियनशिप में रजत पदक जीतकर पहले ही एक कोटा स्थान हासिल कर लिया था।

पैरा एथलीटों ने 3 स्वर्ण सहित छह पदक जीते

इस बीच शाम का सत्र पैरा एथलेटिक्स खिलाड़ियों के नाम रहा। दो बार के पैरालम्पिक रजत पदक विजेता निषाद कुमार, मध्यम दूरी की धाविका सौम्या और भाला फेंक खिलाड़ी रिंकू ने अपनी-अपनी स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीते।

निषाद कुमार ने लंबी कूद में 7.11 मी. की छलांग से बाजी मारी

निषाद के लिए यह प्रदर्शन बेहद खास रहा कि वह अपने करिअर में पहली बार किसी अंतरराष्ट्रीय लंबी कूद स्पर्धा में हिस्सा ले रहे थे। छह वर्ष की उम्र में घास काटने वाली मशीन से हुए हादसे में अपना दायां हाथ गंवाने वाले निषाद ने 7.11 मीटर की छलांग लगाकर पहला स्थान हासिल किया।

महिलाओं की 1500 मीटर टी12-टी13 स्पर्धा में सौम्या व राधा पहले दो स्थान पर

महिलाओं की 1500 मीटर टी12-टी13 स्पर्धा में दृष्टिबाधित सौम्या ने पांच मिनट 12.39 सेकेंड का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता। हमवतन राधा वेंकटेश ने पांच मिनट 30.90 सेकेंड के समय के साथ रजत पदक हासिल किया।

रवन्नी वलासनैनी ने दृष्टिबाधिता की सबसे गंभीर श्रेणी टी11 में जीता कांस्य

दृष्टिबाधिता की सबसे गंभीर श्रेणी टी11 में भारत की रवन्नी वलासनैनी ने कांस्य पदक जीता। इस स्पर्धा में मूल रूप से तीसरे स्थान पर रहने वाली रक्षिता राजू को कपड़ों, जूतों और बिब से जुड़े तकनीकी नियमों का पालन नहीं करने के कारण अयोग्य घोषित कर दिया गया था।

भाला फेंक एफ46 स्पर्धा में रिंकू को स्वर्ण, अजीत दूसरे स्थान पर रहे

पुरुषों की भाला फेंक एफ46 स्पर्धा में भारत का दबदबा रहा। रिंकू ने 65.11 मीटर और अजीत सिंह ने 65.02 मीटर भाला फेंककर क्रमश: स्वर्ण और रजत पदक जीते। दोनों भारतीय खिलाड़ियों का यह इस सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। एफ46 वर्ग उन खिलाड़ियों के लिए है जिनके हाथ में कोहनी के ऊपर या नीचे विच्छेदन हुआ हो या उन्हें इसी तरह की शारीरिक अक्षमता हो।

जूडोकाओं ने जीते रजत सहित 2 पदक

भारत के दृष्टिबाधित जूडो खिलाड़ियों ने दो पदक जीते, जिनमें कोकिला ने महिलाओं के जे2-52 किग्रा वर्ग में रजत पदक जबकि कपिल परमार ने पुरुषों के जे1-70 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक अपने नाम किया।

हांगझू खेलों की कांस्य विजेता कोकिला ने रजत पदक हासिल किया

हांगझू एशियाई पैरा खेलों की कांस्य पदक विजेता कोकिला को फाइनल में किर्गिस्तान की ऐबिके उलानबेक काइजी के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। काइजी ने महज 21 सेकेंड में इप्पोन हासिल करके स्वर्ण पदक जीत लिया। जूडो में इप्पोन सबसे अधिक अंक देने वाला मूव है, जिससे मुकाबला तुरंत जीत लिया जाता है।

पिछली बार के रजत विजेता कपिल अबकी कांस्य पा सके

पिछले एशियाई पैरा खेलों में रजत पदक जीतने वाले कपिल को सेमीफाइनल में इंडोनेशिया के जुनेदी के खिलाफ 0-1 से हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद उन्होंने कांस्य पदक के मुकाबले में जगह बनाई। एक अन्य इंडोनेशियाई खिलाड़ी अहनाफ रफली शिदकी के खिलाफ कांस्य पदक के मुकाबले में कपिल ने एक इप्पोन हासिल करके 1-0 से जीत दर्ज की। यह मुकाबला एक मिनट से कुछ अधिक समय तक चला।

दृष्टिबाधित खिलाड़ियों की जूडो स्पर्धाएं जे1 और जे2 वर्गों में आयोजित होती हैं। जे2 वर्ग के खिलाड़ियों में दृष्टिबाधिता होती है, लेकिन आमतौर पर उनकी देखने की क्षमता जे1 वर्ग के खिलाड़ियों से बेहतर होती है। जे1 वर्ग में पूरी तरह दृष्टिहीन खिलाड़ी भी शामिल होते हैं।

तैराकी में रवि कार्तिक के नाम रजत पदक

रवि कार्तिक बुडिगिना ने पुरुषों की 100 मीटर फ्रीस्टाइल एस13 स्पर्धा में 56.68 सेकेंड का समय निकालकर रजत पदक जीता। एस13 वर्ग में कम दृष्टिबाधिता वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं।

टेबल टेनिस के तीन अलग-अलग वर्गों में पदक पक्के

पैरालम्पिक रजत पदक विजेता भाविना पटेल सहित भारत के कई टेबल टेनिस खिलाड़ियों ने सेमीफाइनल में जगह बनाकर देश के लिए तीन अलग-अलग वर्गों में पदक पक्के किए। प्राची पांडे ने महिला वर्ग छह के मुकाबले में थाईलैंड की कानोकपॉर्न फाथुमचाई को हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। सोनलबेन ने वर्ग तीन में थाईलैंड की दरारत असायुत को शिकस्त दी। भाविना ने वर्ग चार-पांच में चीन की झांग मियाओ को हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया।

प्राची पांडे, सोनलबेन व भाविना पटेल सेमीफाइनल में

प्राची न्यूरो-डिजेनेरेटिव बीमारी से पीड़ित हैं। उन्होंने ग्रुप चरण के अपने दूसरे मुकाबले में फाथुमचाई को 11-5, 11-4, 11-13, 12-10 से हराया। इस जीत के साथ वह एक जीत और एक हार के रिकॉर्ड के साथ ग्रुप ए में दूसरे स्थान पर रहीं। प्राची के सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ ही एशियाई पैरा खेलों की इस स्पर्धा में भारत का पहला पदक सुनिश्चित हो गया।

वर्ग छह में ऐसे खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा करते हैं जिनके दोनों हाथों और पैरों में गंभीर शारीरिक अक्षमता होती है और जो खड़े होकर खेलते हैं। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से एमटेक की पढ़ाई पूरी कर चुकीं प्राची फाइनल में जगह बनाने के लिए मंगलवार को इराक की नजला अल-दय्येनी से भिड़ेंगी।

सोनलबेन ने महिला एकल वर्ग तीन के क्वार्टर फाइनल में दरारत को 3-1 (11-7, 8-11, 11-5, 11-5) से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। वर्ग तीन में ह्वीलचेयर पर बैठकर खेलने वाले ऐसे खिलाड़ी शामिल होते हैं, जिनका बैठने के दौरान संतुलन कमजोर होता है और धड़ पर नियंत्रण सीमित होता है जबकि बांह और हाथों की कार्यक्षमता सामान्य या लगभग सामान्य रहती है।

राष्ट्रमंडल खेलों की पूर्व स्वर्ण पदक विजेता भाविना ने भी वर्ग चार-पांच के क्वार्टर फाइनल में चीन की झांग मियाओ को 3-1 (8-11, 11-6, 11-1, 11-6) से हराकर अपनी श्रेष्ठता साबित की। वर्ग चार-पांच में शारीरिक अक्षमता वाले वे खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा करते हैं जो बैठकर खेलते हैं। तीनों भारतीय खिलाड़ियों का कम से कम कांस्य पदक जीतना सुनिश्चित हो गया है।

नितेश कुमार व थुलासिमथी मुरुगेसन की मिश्रित युगल जोड़ी सेमीफाइनल में

बैडमिंटन में नितेश कुमार व थुलासिमथी मुरुगेसन की भारतीय जोड़ी ने मिश्रित युगल में एसएल3-एसयू5 ग्रुप बी में सेमीफाइनल में प्रवेश करके पदक पक्का किया। भारतीय जोड़ी को अपने पहले मैच में चीन की यांग जियानयुआन और यांग किउक्सिया से वॉकओवर मिला। इसके बाद उन्होंने चीन के चेन पेंगफेई और हुआंग ज़िक्सुआन को सिर्फ 23 मिनट में 21-4, 21-18 से हराकर ग्रुप रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल किया।

पेरिस पैरालम्पिक के चैंपियन नितेश ने पुरुष एकल एसएल3 श्रेणी के ग्रुप ए में दक्षिण कोरिया के जू डोंगजे को 21-13, 21-15 से हराकर आसान जीत दर्ज की। रुथिक रघुपाथी ने पुरुष एकल एसयू5 ग्रुप सी मैच में थाईलैंड के सोमसिरी प्रिचा पर 21-12, 21-12 से जीत हासिल करके भारत की जीत का सिलसिला जारी रखा।

पैरा बैडमिंटन में एसएल3 उन खिलाड़ियों के लिए है, जिनके निचले अंगों में गंभीर विकलांगता है और जो आधे कोर्ट पर प्रतिस्पर्धा करते हैं, जबकि एसयू5 उन खिलाड़ियों के लिए है जिनके ऊपरी अंगों में विकलांगता है। मिश्रित युगल में जोड़ियां इन दोनों श्रेणियों के खिलाड़ियों को मिलाकर बनाई जाती हैं।

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