परिवृत्त बद्ध पार्श्वकोणासन : रीढ़ की लचक से लेकर मानसिक एकाग्रता तक, जानें इस योगासन के फायदे

लखनऊ, 12 अक्टूबर। भारतीय योग परंपरा में कई ऐसे आसन हैं, जो शरीर को मजबूत बनाने के साथ मानसिक एकाग्रता और संतुलन विकसित करने में भी मदद करते हैं। परिवृत्त बद्ध पार्श्वकोणासन ऐसा ही एक चुनौतीपूर्ण योगासन है। इसमें शरीर को एक ओर घुमाने, पैरों को मजबूती से टिकाने और हाथों को बांधने की मुद्रा का अभ्यास किया जाता है। यह पार्श्वकोणासन का उन्नत रूप माना जाता है, जिसमें लचीलापन, संतुलन और सही श्वास तकनीक का विशेष महत्व है।

क्या है परिवृत्त बद्ध पार्श्वकोणासन?

संस्कृत में ‘परिवृत्त’ का अर्थ घूमना, ‘बद्ध’ का अर्थ बंधा हुआ और ‘पार्श्वकोण’ का अर्थ बगल का कोण होता है। इस आसन में शरीर को एक तरफ घुमाते हुए हाथों को बांधने की कोशिश की जाती है। इसका अभ्यास करने के लिए पैरों, कूल्हों, रीढ़ और कंधों में पर्याप्त लचीलापन होना जरूरी है। यह आसन केवल शारीरिक स्ट्रेचिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि संतुलन बनाए रखने, सांस पर ध्यान केंद्रित करने और शरीर की गतिविधियों के बीच तालमेल विकसित करने में भी सहायक हो सकता है।

परिवृत्त बद्ध पार्श्वकोणासन के प्रमुख फायदे

1. रीढ़ की हड्डी में लचीलापन: इस आसन में शरीर को नियंत्रित तरीके से घुमाया जाता है। इससे रीढ़ के आसपास की मांसपेशियों की गतिशीलता बढ़ाने और पीठ की जकड़न कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसे दर्द सहते हुए नहीं करना चाहिए।

2. पैरों और जांघों को मजबूती: आसन के दौरान पैरों को मजबूती से जमीन पर टिकाए रखना पड़ता है। इससे जांघों, पैरों और कूल्हों की मांसपेशियों को सक्रिय रखने में मदद मिलती है। नियमित अभ्यास से शारीरिक संतुलन भी बेहतर हो सकता है।

3. पाचन और पेट की मांसपेशियों पर प्रभाव: शरीर को मोड़ने की मुद्रा में पेट की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। इससे शरीर की गतिशीलता और मांसपेशियों के नियंत्रण में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस आसन से शरीर के टॉक्सिन बाहर निकलने या कब्ज और ब्लोटिंग ठीक होने का ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

4. सांस लेने और छाती की गतिशीलता में मदद: सही तरीके से सांस लेते हुए आसन करने से श्वास पर नियंत्रण और छाती की गतिशीलता का अभ्यास होता है। हाथों को बांधने की स्थिति में असुविधा होने पर जबरदस्ती खिंचाव नहीं देना चाहिए।

5. एकाग्रता और मानसिक संतुलन: इस आसन में शरीर का संतुलन बनाए रखने और सांस पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत होती है। नियमित योगाभ्यास से ध्यान, शरीर के प्रति जागरूकता और मानसिक स्थिरता विकसित करने में मदद मिल सकती है।

परिवृत्त बद्ध पार्श्वकोणासन करते समय बरतें सावधानी

यह एक अपेक्षाकृत कठिन योगासन है। शुरुआत में इसे किसी प्रशिक्षित योग शिक्षक के मार्गदर्शन में करना बेहतर रहता है। यदि घुटनों, कंधों, गर्दन या रीढ़ की हड्डी में हालिया चोट, गंभीर दर्द अथवा कोई चिकित्सकीय समस्या है, तो बिना विशेषज्ञ की सलाह के इसका अभ्यास न करें। आसन करते समय सांस न रोकें और शरीर को जरूरत से ज्यादा न मोड़ें। यदि दर्द, चक्कर या असामान्य असुविधा महसूस हो, तो तुरंत अभ्यास रोक दें।

ध्यान रखें: योगासन शारीरिक सक्रियता, लचीलेपन और मानसिक एकाग्रता के लिए उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन इन्हें किसी बीमारी के निश्चित इलाज या शरीर को विषमुक्त करने की गारंटी के रूप में नहीं देखना चाहिए।

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