आजमगढ़, 24 सितम्बर। यूपी में आजमगढ़ जिले के अहिरौला थानान्तर्गत शंभूपुर गांव में दो दिन पूर्व तांत्रिक पूजा के दौरान हुए खूनी तांडव के बाद अनाथ हुईं दोनों बच्चियों को पुलिस अधीक्षक (SP) डॉ. अनिल कुमार ने गोद ले लिया है। पूजा करा रहे दो ब्राम्हणों के अलावा सिरफिरे अरविंद, उसकी पत्नी व बेटे यानी कुल पांच लोगों की मौत के बाद दोनों बच्चियों के भविष्य को लेकर लोगों में चिंता थी।
बच्चियों की पढ़ाई-लिखाई और सुरक्षित भविष्य की जिम्मेदारी उठाएंगे
खैर, एसपी डॉ. अनिल कुमार ने दोनों अनाथ बच्चियों की परवरिश की चिंताओं के बीच अपनी तरफ से पहल की। उनके अलावा दोनों बच्चियों के लिए जिले के पुलिसकर्मी भी सहायता देने आगे आए। एसपी ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत में अपने निर्णय की
जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दोनों बच्चियों की पढ़ाई-लिखाई और सुरक्षित भविष्य की जिम्मेदारी वह व्यक्तिगत रूप से उठाएंगे। वह अपनी एक महीने की पूरी सैलरी बच्चियों के नाम देंगे ताकि उनके भविष्य को आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
जिले के पुलिसकर्मी भी देंगे एक दिन का वेतन, बच्चियों की दादी होंगी नामिनी
उन्होंने बताया कि जिले के सभी पुलिसकर्मी भी स्वैच्छिक रूप से अपना एक दिन का वेतन बच्चियों के भविष्य के लिए देंगे। इस राशि की एफडी कराई जाएगी और बच्चियों की दादी को नामिनी बनाकर सुरक्षित रखा जाएगा। इसका उद्देश्य दोनों बच्चियों की शिक्षा और भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित करना है।
घटना में प्रभावित दोनों ब्राह्मण परिवारों को भी सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रयास होगा
डॉ. अनिल कुमार ने यह भी कहा कि मदद केवल अरविंद की दोनों बच्चियों तक सीमित नहीं रहेगी। घटना में प्रभावित दोनों ब्राह्मण परिवारों को जिलाधिकारी के माध्यम से शासन की विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
शौर्य की मौत पर उठे सवालों का भी एसपी ने दिया जवाब
अरविंद के आठ वर्षीय बेटे शौर्य की गोली लगने से मौत को लेकर सोशल मीडिया और लोगों के बीच यह चर्चा रही कि बच्चे को पुलिस की गोली लगी होगी। इस पर एसपी डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्चे को लगभग 7.30 सेंटीमीटर की दूरी से गोली लगने की बात सामने आई है। पोस्टमार्टम के अनुसार बच्चे को लगी गोली 32 बोर के कारतूस से चली थी जबकि पुलिस टीम के पास 9 एमएम की कारतूस होती है। एसपी ने इस आधार पर चर्चाओं को खारिज किया।
अरविंद के पास मिले 18 जिंदा कारतूस
एसपी के अनुसार पोस्टमार्टम के दौरान सनकी अरविंद के लोअर से 18 जिंदा कारतूस भी बरामद हुए। शुरुआती तीन हत्याओं (पत्नी व पूजा करा रहे दोनों ब्राह्मण) के दौरान अरविंद अपनी रिवॉल्वर के कारतूस इस्तेमाल कर चुका था। लेकिन इसके बाद उसने दोबारा रिवॉल्वर लोड की और कमरे के अंदर से अपने बच्चे तथा पुलिस टीम पर फायरिंग की। अरविंद के पास से टॉर्च, भांग की गोली, तंबाकू और गुटखा भी बरामद हुआ है। मामले में पुलिस की जांच अब भी जारी है और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों को भी जांच में शामिल किया जा रहा है।

पुलिस ने 8 घंटे तक किया समझाने का प्रयास
डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि पुलिस का पहला प्रयास बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना था। इसी वजह से ऑपरेशन को जल्दबाजी में अंजाम देने के बजाय पुलिस टीम ने काफी धैर्य के साथ काम किया। करीब आठ घंटे तक अरविंद को कमरे से बाहर आने और बच्चों को सुरक्षित छोड़ने के लिए समझाया जाता रहा। बाद में कमरे के अंदर से गोली चलने की आवाज आने के बाद स्थिति गंभीर हो गई. बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केवल तीन पुलिसकर्मी कमरे के अंदर दाखिल हुए और ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।
एसपी ने कहा कि पुलिस टीम ने पूरे ऑपरेशन में बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। घटना की जांच पुलिस की ओर से आगे भी जारी रहेगी, लेकिन इस दुखद घटना के बाद बच्चियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए मानवीय आधार पर उन्हें गोद लेने का निर्णय लिया गया है।
सिरफिरे अरविंद की सनक में शुरू हुए खूनी खेल का 5 लोगों की मौत से दुःखद अंत
उल्लेखनीय है कि सिरफिरे अरविंद अरविंद ने मंगलवार (22 सितम्बर) की शाम को पत्नी और दो पंडितों की गोली मारकर हत्या करने के बाद तीन बच्चों (एक बेटा व दो बेटियां) को कमरे में बंधक बनाकर पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। पुलिस के समझाने के बावजूद वह सरेंडर करने को तैयार नहीं हुआ इस दौरान कमरे के अंदर से गोली चलने की आवाज आने के बाद पुलिस टीम ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया। पुलिस के अनुसार आरोपित ने बेटे को गोली मारने के बाद टीम पर भी फायरिंग कर दी, जिसके बाद जवाबी फायरिंग में आरोपित को गोली लगी।
एसपी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि पुलिस ने दोनों को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल भेजा, जहां इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई। 10 वर्ष व छह माह की दोनों बच्चियों को सकुशल बचा लिया गया।
5 दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान बना विवाद की वजह
परिजनों ने पुलिस को बताया कि अरविंद कुमार की मानसिक स्थिति पहले से ठीक नहीं रहती थी। उसकी मानसिक स्थिति खराब होने का कारण भूत-प्रेत की बाधा माना जा रहा था। इसी को लेकर घर में मानसिक स्थिति में सुधार और कथित भूत-प्रेत की बाधा दूर करने के उद्देश्य से पांच दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान कराया जा रहा था। 22 सितम्बर को अनुष्ठान का चौथा दिन था, तभी ये खूनी खेल शुरू हो गया।
घर में पूजा-पाठ देखकर भड़का अरविंद
दिल दहला देने वाली कहानी की शुरुआत मंगलवार शाम पूजा के दौरान उस वक्त हुई, जब बाजार से घर पहुंचा अरविंद सिंह पंडितों से आधार कार्ड मांगने लगा। इसीको लेकर हुए विवाद के बाद पिस्टल से फायरिंग कर दी. इस घटना में पत्नी बबिता सिंह (40), पं. महेंद्र पाठक (42) व पं. अखिलेश मिश्र (55) की गोली लगने से मौके पर ही मौत हो गई। गोली चलने की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, जिसके बाद आरोपित ने खुद को तीन बच्चों बेटी परी (10), बेटा शौर्य (9) और छह माह की बेटी संग कमरे में कैद कर लिया।


