गांधीनगर, 22 सितम्बर। गुजरात के सभी सरकारी कार्यालयों में ‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ अभियान के तहत स्वच्छता और रिकॉर्ड प्रबंधन का 100 अंकों के पैमाने पर मूल्यांकन किया जाएगा। इस अभियान में वर्षों से जमा कबाड़ (स्क्रैप), ई-वेस्ट और अनुपयोगी सामग्री के निस्तारण पर विशेष जोर दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता बढ़ाना, रिकॉर्ड के बेहतर प्रबंधन को सुनिश्चित करना और बेकार पड़ी वस्तुओं को हटाकर कार्यस्थलों को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ अभियान के तहत किया जाएगा मूल्यांकन
मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल की अगुआई में 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक चलाए जा रहे इस अभियान का मकसद सरकारी दफ्तरों में साफ-सफाई और कामकाज के तरीके को बेहतर बनाना है। साथ ही, इसमें पुरानी फाइलों, रिकॉर्ड, इस्तेमाल न होने वाली चीजों और इलेक्ट्रॉनिक कचरे को हटाने या निबटाने पर भी जोर दिया जाएगा। यह अभियान महात्मा गांधी की जयंती के मौके पर ‘स्वच्छता में सहभाग, स्वच्छ भारत, विकसित भारत’ थीम के तहत चलाया जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के मुताबिक दफ्तरों का मूल्यांकन 100 अंकों के आधार पर किया जाएगा।
दफ्तरों को 3 श्रेणियों – बेस्ट, इमर्जिंग और एस्पायरिंग में बांटा जाएगा
स्कोर में 20 प्रतिशत अंक लंबित फाइलों को निबटाने के लिए, 30 प्रतिशत अंक रिकॉर्ड के वर्गीकरण के लिए और बाकी 50 प्रतिशत अंक कबाड़, ई-कचरे और इस्तेमाल न होने वाली चीजों को हटाने और दफ्तर की साफ-सफाई के लिए होंगे। इस अभियान में सचिवालय के विभाग, गांधीनगर में विभागाध्यक्षों के दफ्तर और जिला व तालुका स्तर के सरकारी दफ्तर शामिल होंगे। दफ्तरों को तीन श्रेणियों – बेस्ट, इमर्जिंग और एस्पायरिंग में बांटा जाएगा।
दफ्तरों को कबाड़ बेचकर हुई कमाई का ब्योरा देना होगा
जिला स्तर पर यह अभियान कलेक्टर की अगुआई में चलाया जाएगा जबकि तालुका स्तर पर मामलेदार इसकी देखरेख करेंगे। सरकार इस अभियान के असल असर को जानने के लिए अभियान से पहले और बाद में दफ्तरों की स्थिति की तुलना भी करेगी। दफ्तरों को निबटाई गई पुरानी और लंबित फाइलों, वर्गीकृत रिकॉर्ड, बेकार सामान हटाने के बाद खाली हुई जगह और कबाड़ बेचकर हुई कमाई का ब्योरा देना होगा।
रिपोर्ट के साथ तस्वीरें और जरूरी दस्तावेज भी जमा करने होंगे
रिपोर्ट के साथ तस्वीरें और जरूरी दस्तावेज भी जमा करने होंगे। 30 जून, 2026 की स्थिति को आधार माना जाएगा जबकि 17 अक्टूबर की अंतिम स्थिति से अभियान के दौरान हुई प्रगति को मापा जाएगा। रिपोर्ट 31 अक्टूबर तक जमा करनी होंगी। इसके बाद एक उच्चस्तरीय समिति दफ्तरों के कामकाज का मूल्यांकन करेगी और 30 नवंबर तक अंतिम सूची तैयार करेगी। चुने गए दफ्तरों को 25 दिसम्बर को प्रमाण-पत्र दिए जाएंगे।
चुने गए दफ्तरों को 25 दिसम्बर को प्रमाण-पत्र दिए जाएंगे
इस अभियान से राज्य सरकार को पूरे राज्य का डेटा इकट्ठा करने में मदद मिलेगी, जिसमें निबटाई गई पुरानी फाइलों की संख्या, वर्गीकृत किए गए रिकॉर्ड, हटाए गए स्क्रैप और ई-वेस्ट की मात्रा, खाली कराई गई ऑफिस की जगह और निबटान से हुई कमाई की जानकारी शामिल होगी।


