नई दिल्ली, 21 सितम्बर। वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद आगामी सात अक्टूबर को होने वाली बैठक में छोटे व्यवसायों के लिए UPI शुल्क पर कर में राहत देने पर विचार कर सकती है। वेबसाइट Moneycontrol ने सरकारी सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है।
रिपोर्ट के अनुसार सरकारी सूत्रों का कहना है कि GST काउंसिल की बैठक में बड़े UPI ट्रांजैक्शन पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) पर GST से राहत देने के तरीकों पर चर्चा हो सकती है, खासकर उन छोटे व्यापारियों के लिए, जो GST के तहत पंजीकृत नहीं हैं।
GST नियमों के तहत, जिन व्यवसायों का सालाना टर्नओवर सामान के लिए 40 लाख रुपये या सर्विस के लिए 20 लाख रुपये से कम है, उन्हें आम तौर पर पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होती है। बिना रजिस्ट्रेशन वाले व्यवसाय के तौर पर वे इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा नहीं कर सकते। इसलिए, जब UPI ट्रांजैक्शन पर MDR पर GST लगता है तो छोटे व्यापारी अतिरिक्त टैक्स लागत की भरपाई नहीं कर पाते।
उल्लेखनीय है कि आगामी 15 अक्टूबर से दो हजार रुपये से ज्यादा के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगेगा और MDR पर 18 प्रतिशत GST लगेगा, न कि ट्रांज़ैक्शन वैल्यू पर। MDR का पूरा बोझ व्यापारी पर पड़ता है और ट्रांजैक्शन सेटल होने पर बैंक इसे काट लेता है।
रिपोर्ट के अनुसार पिछले सप्ताह सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया था कि कम्पनियां ITC रूट के जरिए MDR पर चुकाए गए GST का दावा कर सकती हैं, बशर्ते वे टैक्स अधिकारियों के पास पंजीकृत हों और ऐसा सामान और सर्विस सप्लाई करती हों, जो GST से छूट-प्राप्त न हों।
अधिकारी ने कहा, ‘कई छोटे व्यवसायी अधिकारियों के पास पंजीकृत नहीं हैं। वे ITC फायदे के लिए अयोग्य हो सकते हैं। जीएसटी काउंसिल ऐसे तरीके पर चर्चा कर सकती है, जिससे ऐसे व्यवसाय पर बहुत ज़्यादा असर न पड़े।’


