नई दिल्ली, 22 जुलाई। नीट पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर छोड़े गए अश्रु गैस के गोले व लाठीचार्ज को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बिफर उठी है।
देश की दोनों प्रमुख पार्टियों में राजनीतिक टकराव के बाद बुधवार भारतीय जनता पार्टी ने देशभर में कांग्रेस कार्यालयों के बाहर विरोध प्रदर्शन करने की योजना बनाई है। यह कदम कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास (PMO) के बाहर विरोध प्रदर्शन करने के एक दिन बाद उठाया गया है, जिससे सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष के बीच चल रहा टकराव और बढ़ गया है।
एक तरफ कांग्रेस जहां NEET पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि वह संसद में इस मामले पर चर्चा के लिए तैयार है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भाजपा देशभर में राज्य कांग्रेस मुख्यालयों के बाहर विरोध प्रदर्शन आयोजित कर सकती है। पार्टी ने राहुल गांधी पर प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन करके जान बूझकर कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब करने का आरोप लगाया है।
भाजपा ने कांग्रेस पर प्रधानमंत्री की सुरक्षा से समझौता करने की कोशिश और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के आवासों के बाहर विरोध प्रदर्शन करने की राजनीतिक संस्कृति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। प्रस्तावित प्रदर्शन मंगलवार के आंदोलन के दौरान कांग्रेस के व्यवहार के विरोध में किए जाने की उम्मीद है, जिसे भाजपा गलत बता रही है।
उल्लेखनीय है कि NEET पेपर लीक विवाद राजनीतिक लड़ाई के केंद्र में बना हुआ है और कांग्रेस केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ी हुई है। राहुल गांधी ने, जिन्होंने पहले संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की थी, अब अपनी मांगों का दायरा बढ़ाते हुए धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, दोनों के इस्तीफे की मांग रख दी है।
विपक्षी नेताओं का जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन को समर्थन
वहीं जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध प्रदर्शन को कई विपक्षी नेताओं का समर्थन भी मिला है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल मंगलवार को दिन में विरोध स्थल पर पहुंचे, जबकि शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शाम को प्रदर्शन में शामिल होकर अपना समर्थन दिया। गौरतलब है कि राहुल गांधी इस विरोध आंदोलन से जुड़े सबसे सक्रिय राजनीतिक नेताओं में से एक रहे हैं, जो अक्सर प्रदर्शनों में भाग लेते रहे हैं और संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह यह मुद्दा उठाते रहे हैं।

